हिमाचल प्रदेश की बारहवीं विधानसभा इन वजहों से याद रहेगी। कांग्रेस नेतृत्व की निवर्तमान सरकार में विधानसभा के तमाम सत्र शोर-शराबे में ही गुजरे। नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व का विपक्ष कांग्रेस सरकार के समय से पूर्व गिरने की बातें करता रहा, मगर कांग्रेस ने पूरे पांच साल तक शासन संभाला। अब तेरहवीं विधानसभा में भाजपा सत्ता संभालेगी।
2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने वीरभद्र सिंह को ही राज्य की प्रचार कमेटी की कमान दी थी, जैसा कि इस बार तेरहवीं विधानसभा में किया गया। पूर्व धूमल सरकार ने वीरभद्र सिंह के केंद्रीय मंत्री रहते हुए उनके खिलाफ सीडी मामले में भ्रष्टाचार के आरोपों में मुकदमा चलाया। विरोधी धड़ों के भरसक विरोध के बावजूद बाद में वीरभद्र ही मुख्यमंत्री बने।
पिछली बार 25 दिसंबर 2012 को उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। ठीक एक दिन पहले ही 24 दिसंबर को वीरभद्र को विशेष न्यायाधीश शिमला की अदालत ने सीडी मामले पर फैसला सुनाते हुए बरी कर दिया। मुख्यमंत्री पद पर शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रिमंडल में विरोधी खेमे के कई नेताओं को भी तरजीह दी। सीडी मामले से बरी होने पर भी विपक्ष ने वीरभद्र सिंह को सीबीआई और ईडी में चल रहे मामलों को लेकर भी घेरे रखा।
मगर सरकार ने पूरे किए पांच साल
विधानसभा के कई सत्र विपक्ष के शोर-शराबे में ही गुजरे। वीरभद्र को कुर्सी छोड़ने के लिए दबाव बनाया जाता रहा। समय से पूर्व ही भाजपा लगातार सरकार के गिर जाने की बात भी करती रही, मगर सरकार ने पूरे पांच साल निर्बाध निकाले। तमाम प्रयासों के बावजूद राज्य की अर्थव्यवस्था को बारहवीं विधानसभा के इस कार्यकाल में भी पिछली सरकारों की तरह ही कर्ज से नहीं उबारा जा सका।
आज हिमाचल करीब 50 हजार करोड़ रुपये का ऋण झेल रहा है। वीरभद्र सरकार कर्मचारियों और समाज के तमाम वर्गों को खुश करने के प्रयास में रही। कांग्रेस सरकार के पांच साल के कार्यकाल में उपचुनाव की नौबत आई। मुख्यमंत्री बनते ही सीएम वीरभद्र सिंह को मंडी लोकसभा सीट से इस्तीफा देना पड़ा।
उपचुनाव में वहां से मुख्यमंत्री की पत्नी प्रतिभा सिंह सांसद बनी। इसी विधानसभा के कार्यकाल में निर्दलीय विधायक राजेंद्र राणा के कांग्रेस का टिकट लेकर लोकसभा चुनाव लड़ने से सुजानपुर विधानसभा सीट खाली हुई।
विधानसभा उपचुनाव हुए तो..
राजेंद्र राणा यह चुनाव हार गए। लोकसभा के साथ ही विधानसभा के उपचुनाव हुए तो भाजपा के नरेंद्र ठाकुर ने राजेंद्र राणा की पत्नी एवं कांग्रेस की प्रत्याशी अनिता राणा को हरा दिया। इससे पहले तक कांग्रेस की झोली में 36, भाजपा के पास 26 और निर्दलीय विधायक पांच और एक हिलोपा विधायक थे।
फिर भाजपा की सीटें बढ़कर 27 हो गई। भोरंज से भाजपा के विधायक आईडी धीमान के देहांत के बाद हाल ही में विधानसभा उपचुनाव हुए तो इस सीट से स्वर्गीय आईडी धीमान के बेटे डॉ. अनिल धीमान भाजपा के टिकट पर जीते। हिलोपा के एकमात्र विधायक महेश्वर सिंह ने भी अपनी पूरी पार्टी के साथ भाजपा को ज्वाइन किया।
इस तरह से भाजपा की सीटें बढ़कर 28 हो गईं। कुछ महीने पहले मंत्री कर्ण सिंह के देहांत के बाद से बंजार सीट खाली हो गई। मौजूदा वक्त में कांग्रेस के पास 35 विधायक ही रह गए थे, क्योंकि इस सीट पर उपचुनाव नहीं हुए। अब चुनाव नतीजे आने के बाद तेरहवीं विधानसभा का कार्यकाल शुरू हो जाएगा। इन चुनाव में भाजपा ने अपना परचम लहराया है।