एक-दूसरे को ट्रैक करते हुए साथ काम करते हैं ड्रोन व रोबोट
शोधकर्ताओं की विकसित नई सहकारी प्रणाली में ड्रोन (यूएवी) और एक मानवरहित जमीनी वाहन रोबोट (यूजीवी) लगातार एक-दूसरे को ट्रैक करते हुए साथ काम करते हैं। ड्रोन जमीन पर मौजूद रोबोट की स्थिति पर नजर रखता है और उसी के आधार पर अपनी दिशा तय करता है। दूसरी ओर जमीन पर मौजूद रोबोट ऊपर उड़ते ड्रोन की स्थिति पहचानकर उसी के नीचे-नीचे चलता रहता है। यही तालमेल इस तकनीक को खास बनाता है। हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में इस तकनीक की उपयोगिता सबसे ज्यादा मानी जा रही है। हर साल मानसून के दौरान भूस्खलन, बाढ़ और बादल फटने की घटनाओं में सड़कें टूट जाती हैं और गांवों का संपर्क कट जाता है। ऐसे हालात में यह रोबोटिक जोड़ी राहत का पहला जरिया बन सकती है।
जवानों और किसानों के लिए भी नई ताकत बनेगी यह प्रणाली
यह तकनीक सिर्फ आपदा तक सीमित नहीं है। सेना के लिए भी यह प्रणाली नई ताकत बन सकती है। दुर्गम सीमा क्षेत्रों में ड्रोन ऊपर से निगरानी करेगा और इलाके की स्थिति की जानकारी देगा, जबकि ग्राउंड रोबोट हथियार, गोला-बारूद और जरूरी रसद लेकर आगे बढ़ सकेगा। इससे जवानों को सीधे जोखिम वाले इलाकों में जाने की जरूरत कम होगी और अभियान ज्यादा सुरक्षित हो सकेंगे। खेती और बागवानी के क्षेत्र में भी यह तकनीक नई संभावनाएं खोलेगी। ड्रोन ऊपर से फसलों और बागानों की निगरानी कर बीमारी, नमी और पोषण की स्थिति का आकलन करेगा। जमीन पर मौजूद रोबोट उसी स्थान तक खाद, दवा और पानी पहुंचाएगा। पहाड़ी क्षेत्रों में जहां खेत और बागान दुर्गम इलाकों में फैले होते हैं, वहां यह तकनीक किसानों और बागवानों के लिए समय और लागत दोनों बचा सकती है।
बहुमंजिला इमारतों में आग बुझाने का नया मॉडल
इस शोध का सबसे व्यावहारिक प्रयोग आग बुझाने में सामने आया है। बहुमंजिला इमारतों में लगी आग तक पहुंचना दमकल कर्मियों के लिए मुश्किल होता है। ऐसे में ड्रोन ऊपरी मंजिलों तक पहुंचकर आग की पहचान करेगा और उसे निशाना बनाकर बुझाएगा। पानी का भारी पंप जमीन पर मौजूद रोबोट पर रखा जाएगा और एक पाइप के जरिए पानी सीधे ड्रोन तक पहुंचेगा। रोबोट नीचे चलता रहेगा, जिससे पानी की सप्लाई बनी रहेगी।
ऐसे काम करेगी रोबोटिक जोड़ी
इस तकनीक में ड्रोन जमीन पर मौजूद रोबोट को ऊपर से लगातार ट्रैक करेगा। जमीन पर लगे विशेष मार्कर और कैमरे की मदद से ड्रोन उसकी स्थिति पहचानकर अपने रास्ते और उड़ान को नियंत्रित करेगा। दूसरी ओर जमीन पर मौजूद रोबोट ऊपर उड़ रहे ड्रोन की स्थिति पहचानकर उसी दिशा में आगे बढ़ेगा। यानी ड्रोन रास्ता बताएगा और रोबोट उस रास्ते पर जिम्मेदारी निभाएगा। यह पूरा सिस्टम एक सेकेंड में करीब 10 बार अपनी स्थिति अपडेट करता है, जिससे दोनों के बीच तालमेल लगातार बना रहता है।
इन्होंने विकसित की तकनीक
आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ मैकेनिकल एंड मैटेरियल्स इंजीनियरिंग के शोधकर्ता अशोक कुमार सिवाराथ्री और सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स के डॉ. अमित शुक्ला ने ड्रोन और ग्राउंड रोबोट के समन्वित संचालन की तकनीक विकसित की।
यह शोध ड्रोन और ग्राउंड रोबोट के बीच स्वायत्त समन्वय को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। हमने ऐसी प्रणाली पर काम किया है, जिसमें ड्रोन और ग्राउंड वाहन बिना मानवीय हस्तक्षेप के एक-दूसरे को ट्रैक करते हुए समन्वित तरीके से कार्य करते हैं। इसका उपयोग आपदा प्रबंधन, निगरानी, कृषि और अग्निशमन जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। - डॉ. अमित शुक्ला, सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स, आईआईटी मंडी