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भाजपा सरकार का एक वर्ष पूरा होने पर निकम्मा दिवस मनाएगी कांग्रेस

Mon, 24 Dec 2018 12:03 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल में भाजपा सरकार के एक साल का कार्यकाल पूरा होने पर कांग्रेस पार्टी 27 दिसंबर को ही निकम्मा दिवस मनाने जा रही है। सरकार की कोरी घोषणाओं पर कांग्रेस ने यह दिवस मनाने का फैसला किया है। 27 दिसंबर को जहां भाजपा धर्मशाला में 365 दिन पूरा होने पर पीएम नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में जश्न मना रही होगी, वहीं कांग्रेस शिमला में उसके एक साल के घोटालों और नाकामियों का खुलासा करेगी।

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कांग्रेस की ओर से तैयार चार्जशीट को भी इसी दिन सार्वजनिक किया जाएगा। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक और पदाधिकारी चार्जशीट को राज्यपाल आचार्य देवव्रत को सौंपेंगे। राज्यपाल को चार्जशीट के साथ सरकार की नाकामियों और घोटालों के दस्तावेज भी सौंपे जाएंगे। कांग्रेस पार्टी राज्यपाल से आरोपों पर कार्रवाई की मांग भी करेगी। कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि भाजपा सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल की कोई उपलब्धि नहीं है।

सरकार अभी तक हनीमून पीरियड में ही चल रही है। विकास कार्य ठप हैं। सरकार बिना सोचे समझे घोषणाएं करने में डटी है। धरातल पर उनके क्रियान्वयन को लेकर न तो पहले कोई होमवर्क किया जा रहा, न ही बाद में कोई कदम उठाए जा रहे हैं।
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पूर्व कांग्रेस सरकार में मंजूर कार्यों का ही सरकार श्रेय लेने में जुटी है। सरकार की कार्यप्रणाली से उसके मंत्री ही खफा हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद नेता जनता का दुख दर्द दूर करने के बजाय अपनी झोली भरने में लगे हुए हैं।

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निकम्मा दिवस पर ये रहेंगे मुख्य बिंदु

- प्रदेश में लचर कानून व्यवस्था, आपराधिक तत्वों के हौसले बुलंद। रेप व हत्या के मामले बढ़े।
- हवाई चप्पल वालों को हवाई जहाज की सैर कराने के लिए घोषित उड़ान योजना हुई धराशायी। 2500 का टिकट 18000 में ।
- उड़ान योजना के तहत सीएम जयराम ठाकुर की ओर से घोषित हेली टैक्सी योजना भी ठप। घोषणा के बाद शिमला से चंडीगढ़ तक दो दिन ही चली हेली टैक्सी।
- सेब पर आयात मूल्य पचास फीसदी नहीं बढ़ा पाई सरकार। बागवानों को दो हजार करोड़ का नुकसान।
- गिरीपार के हाटी समुदाय को नहीं दिया गया एसटी का दर्जा।
- बेरोजगारी दूर करने के लिए कोई ठोस नीति नहीं बना पाई सरकार।
- किसानों को उनकी फ सलों का लाभकारी मूल्य देने में विफल।
- केंद्र से प्रदेश के लिए वित्तीय पैकेज लाने में नाकाम। हर महीने लेना पड़ रहा कर्ज।
- प्रदेश की सड़कें खस्ताहाल केंद्र से मंजूर एनएच की डीपीआर तक नहीं बनी।
- स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल, अस्पतालों में डॉक्टर व पर्याप्त सुविधाएं मुहैया कराने को नहीं उठाए कदम।
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