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वीरभद्र पर कार्रवाई से भड़की कांग्रेस, कहा-चूड़ियां नहीं पहनीं, ईंट का जवाब पत्थर से देंगे

Wed, 05 Apr 2017 09:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल के कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई की निंदा की है। कहा है कि षड्यंत्रकारी मुख्यमंत्री का बाल भी बांका नहीं कर सकते हैं। कांग्रेस उपाध्यक्ष गंगूराम मुसाफिर, केहर सिंह खाची, महासचिव रामलाल ठाकुर और कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रेमकुमार धूमल अपनी राजनीतिक खीझ मिटाने को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ अनापशनाप बयानबाजी कर रहे हैं।
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कहा कि उन्होंने भी कोई चूड़ियां नहीं पहन रखी हैं। भाजपा कांग्रेस के धैर्य की परीक्षा न ले। ईंट का जवाब पत्थर से देने में भी सक्षम हैं। कहा कि धूमल एवं उनके पुत्र मुख्यमंत्री के मामले को लेकर इतने उतावले हैं कि वे सभी मान-मर्यादाओं को भी भूलते जा रहे हैं। जनमत का अपमान करना इनकी आदत बन गई है। कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के दिल्ली स्थित फार्म हाउस पर ईडी की कार्रवाई पर हैरानी जताई।

कहा कि एकतरफ यह सारा मामला न्यायालय के विचाराधीन है, दूसरी तरफ संपत्ति को ऐसे अटैच कर रहे हैं, मानों वीरभद्र सिंह अपनी संपत्ति को कहीं उठाकर दूसरी जगह ले जा रहे हों। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ ईडी की कार्रवाई सत्ता में बैठे भाजपा के आकाओं का भारी दबाव है। एक ही मामले में सीबीआई, विजिलेंस और ईडी की कार्रवाई देश की न्याय व्यवस्था को भी चुनौती दे रही है।
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‘धूमल पुत्र प्रदेश के डॉन बनने की कोशिश न करें’ 
कांग्रेस के युवा नेताओं ने अनुराग और अरुण धूमल को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ अभद्र भाषा से वे बाज आएं। अगर धूमल पुत्रों ने ऐसा नहीं किया तो उनके खिलाफ घेराव और विरोध करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

एचपीएसआईडीसी के उपाध्यक्ष अतुल शर्मा, मार्केटिंग बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्रकांत मिश्रा, महेंद्र स्तान, विवेक कुमार और एचआरटीसी के निदेशक मंडल के सदस्य वेद प्रकाश शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के परिवार के खिलाफ धूमल का कोई भी षड्यंत्र कभी सफल नहीं होगा। धूमल पुत्र प्रदेश के डॉन बनने की कोशिश न करें।
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भाजपा नेता शांता ने बोला हमला, कहा सरकार नाम की कोई चीज नहीं

पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद शांता कुमार ने प्रदेश सरकार पर केंद्रीय विवि को लेकर लेटलतीफी पर हमला बोला है। कहा कि सरकार इतनी नालायक है कि सात साल में भी केंद्रीय विवि को शुरू नहीं कर पाई। पढ़ाई के मंदिर पर भी राजनीति करने वाली सरकार हिमाचल का क्या विकास कर सकती है। शांता ने कहा कि भारत सरकार ने सात साल पहले हिमाचल में केंद्रीय विवि खोलने का निर्णय लिया।

प्रदेश की राजनीति और हिमाचल की सरकार इतनी नालायक साबित हुई कि सात साल बाद भी विवि का काम शुरू नहीं कर सकी। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और प्रदेश से बहुत बड़ा अन्याय है। भारत सरकार ने अब अंतिम फैसला कर लिया है कि सीयू का मुख्य परिसर धर्मशाला में होगा। उसका एक परिसर देहरा में भी होगा। बावजूद इसके राज्य सरकार की ओर से औपचारिकताएं पूरी न करने से सीयू का काम शुरू नहीं हो पाया है। 

धर्मशाला में सरकार के बहुत से भवन खाली हैं। सरकार उन्हें केंद्रीय विवि को दे दे तो कई विभाग शुरू किए जा सकते हैं। प्रदेश के हजारों युवा यहां उच्च शिक्षा प्राप्त करने से वंचित रह रहे हैं। लगता है कि सरकार नाम की कोई संस्था हिमाचल में नहीं है। हकीकत यह है कि मुख्यमंत्री नैतिक रूप से पद पर बने रहने का अधिकार खो चुके हैं। वे अदालतों में अपनी पैरवी में लगे हैं। प्रशासन केवल तमाशा देख रहा है। शांता ने कहा कि प्रदेश का हित देख मुख्यमंत्री शालीनता से पद छोड़ दें। यह अहसास करवाएं कि प्रदेश में सरकार नाम की कोई चीज है।
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