ऐसे में यदि चंपा ठाकुर को टिकट नहीं दिया जाता तो यहां बगावत के आसार हैं। किसी और को मैदान में उतारना भी कांग्रेस के लिए कहीं अधिक चुनौती पूर्ण होगा। उधर, हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के सचिव तरुण पाठक ने आश्रय के इस्तीफे को लेकर कहा कि वह अब भाजपा की भाषा बोल रहे हैं। आश्रय ने कभी भी कांग्रेस पार्टी के लिए दिल से काम नहीं किया।
पिछले लोकसभा चुनाव में मंडी संसदीय क्षेत्र से पंडित सुखराम की वजह से जोर जबरदस्ती कर पार्टी का टिकट लेने में सफल हो गए थे। इसमें उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा था। बावजूद इसके कांग्रेस ने उन्हें पूरा सम्मान दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सत्ता में आते ही कर्मचारियों की ओल्ड पेंशन भी लागू करेगी और अपनी 10 गारंटी भी पूरा करेगी। इसके लिए कांग्रेस को आश्रय के किसी ज्ञान की कोई जरूरत नहीं है। आश्रय ने जो भी आरोप लगाए है वह राजनीति से प्रेरित हैं।