मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू (फाइल फोटो)।
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हिमाचल प्रदेश सरकार ने करुणामूलक आधार पर नौकरी का इंतजार कर रहे परिवारों को राहत दी है। सरकार ने उन मामलों पर दोबारा विचार करने का फैसला किया है, जिन्हें पहले केवल आय सीमा के आधार पर खारिज कर दिया गया था। इस संबंध में वित्त विभाग के प्रधान सचिव देवेश कुमार ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों के अनुसार, आवेदकों को 31 दिसंबर तक संबंधित विभागाध्यक्ष के पास नए सिरे से आवेदन करना होगा। आवेदन प्राप्त होने के एक माह के भीतर विभाग को उस पर निर्णय लेना अनिवार्य होगा।
तय समय सीमा के बाद प्राप्त किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। प्रदेश में ऐसे करीब 800 मामले हैं, जो आय सीमा के आधार पर रिजेक्ट हुए थे। इस विशेष राहत के तहत राज्य सरकार ने सीधी भर्ती कोटे के पदों में 5 फीसदी की अधिकतम सीमा में ढील दी है। क्लास-थ्री पदों जॉब ट्रेनी जूनियर ऑफिस असिस्टेंट आईटी के लिए नियुक्तियां कार्मिक विभाग के भर्ती निदेशालय के माध्यम से होंगी। वहीं, क्लास फोर और एमटीडब्ल्यू पदों को सरकार की कॉमन एमटीडब्ल्यू नीति के तहत भरा जाएगा। जांच के बाद यदि कोई आवेदक पात्र पाया जाता है, तो नियुक्तिपत्र जारी करने से पहले मुख्यमंत्री की मंजूरी अनिवार्य होगी।
पहले यह थी व्यवस्था
पूर्व में करुणामूलक नौकरियों के लिए अधिकतम आय सीमा ढाई लाख रुपये रखी गई थी। इसमें प्रति सदस्य 62,500 रुपये आय का प्रावधान रखा था। इस फॉर्मूले के आधार पर 2 या 3 सदस्यों वाले परिवारों में प्रति व्यक्ति आय कम तय होती थी। जबकि उनकी वास्तविक पारिवारिक पेंशन के कारण सदस्यों की आय से ज्यादा हो जाती थी। अब प्रति व्यक्ति वाला फॉर्मूला बंद कर दिया गया है और आय सीमा ढाई से तीन लाख रुपये कर दी है।