27 वर्ष तक की आयु के अनाथ बच्चों, ऐसे परिवार जिनकी मुखिया महिला हो, लेकिन 25 वर्ष से 59 वर्ष की आयु के बीच कोई वयस्क सदस्य न हो, इन्हें भी बीपीएल परिवार की श्रेणी में लाया जाए। 40 फीसदी से अधिक दिव्यांग, डायलिसिस करवाने वाले, हेपेटाइटस-बी, एचआईवी इत्यादि गंभीर बीमारियों से ग्रस्त और दुर्घटना में रीढ़ की हड्डी टूटने वाले व्यक्ति को बीपीएल श्रेणी में शामिल होंगे। मुखिया के अलावा परिवार के किसी भी सदस्य के गंभीर बीमार होने पर भी उनकी पात्रता इस श्रेणी में आएंगे। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इसको लेकर पहले ही ग्रामीण विकास विभाग के साथ बैठक की थी, उन्होंने बीपीएल का दायरा बढ़ाने के निर्देश दिए थे।