फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मंत्रिमंडल में सभी धड़ों को मिली जगह, पर जयराम का दबदबा

Thu, 28 Dec 2017 01:36 PM IST
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, शिमला
विज्ञापन
विज्ञापन
हिमाचल को मुख्यमंत्री का नया चेहरा देने के साथ भाजपा ने मंत्रिमंडल के जरिये लोकसभा चुनाव को दुरुस्त करने के साथ जातीय और क्षेत्रीय समीकरण साधे हैं। सत्ता की कमान जयराम को सौंपने के साथ पार्टी ने मंत्री चयन से मुख्यमंत्री को मजबूत किया है।
विज्ञापन


मंत्रिमंडल के चेहरे और आकार वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर लिया है। प्रदेश में जातीय समीकरणों को ध्यान में रखकर मुख्यमंत्री समेत छह राजपूत नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह मिली है।

आरक्षित वर्गों अनुसूचित जाति एवं जनजाति से तीन चेहरे और पिछड़े वर्ग से एक चेहरा मिला है। ब्राह्मणों से दो को कैबिनेट में मौका मिला। संकेत दिए हैं कि प्रदेश में सियासत अब धूमल, नड्डा और शांता खेमे के इर्द-गिर्द नहीं चलेगी।
विज्ञापन


सभी धड़ों को साधने के साथ संदेश भी दिया है कि जयराम आलाकमान की पसंद हैं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के साथ एबीवीपी की मंत्रिमंडल में दिख रही छाप, जयराम को मजबूती से सरकार बनाने का दांव है। माना जा रहा है कि पूर्व मंत्रियों को बाहर रखना खेमेबाजी के लिए झटका है।

अनिल शर्मा को कांग्रेस छोड़कर आने का इनाम

मंत्रिमंडल में सभी 11 पद भरकर संदेश दिया है कि पार्टी ने जयराम को पूरी ताकत के साथ सत्ता की कमान सौंपी है। कांगड़ा से सर्वाधिक चेहरे मंत्रिमंडल में लिए गए। वर्ष 2012 में कांगड़ा के कारण सत्ता गंवाने का खामियाजा झेल चुकी भाजपा ने इस जिले के लिए पूरा होमवर्क किया है।

दो राजपूत, एक ओबीसी और एक आरक्षित वर्ग जिले से लिया गया। इस जिले में 15 विधानसभा सीटें है। दूसरे बड़े जिले मंडी से दो मंत्री दिए हैं। इनमें महेंद्र ठाकुर सबसे वरिष्ठ हैं, जबकि अनिल शर्मा को कांग्रेस छोड़कर आने का इनाम दिया है।

अनिल को मंत्री बनाने से पंडित सुखराम परिवार के जनाधार का लोकसभा चुनाव में इस्तेमाल करने का दांव भी है। कांगड़ा और मंडी से 44 के आंकड़े के करीब पहुंची भाजपा ने उसका रिटर्न गिफ्ट दोनों जिलों को मुख्यमंत्री और 6 मंत्री देकर दिया है।

शिमला से सुरेश भारद्वाज को मौका देकर पार्टी ने संघ की सुनी है। पार्टी ने प्रदेश में धूमल, नड्डा और शांता खेमे की उतनी ही सुनी, जिससे संतुलन बने। पार्टी ने संघ और विद्यार्थी परिषद में रहे अधिकांश विधायकों को मौका दिया, चाहे वे किसी नेता के करीबी रहे हों।
विज्ञापन

बिंदल, धवाला और बरागटा को रखा बाहर

तीन पूर्व मंत्रियों राजीव बिंदल, रमेश धवाला और नरेंद्र बरागटा को मंत्री परिषद से बाहर किया गया। शांता के करीबी ज्वालामुखी विधायक रमेश धवाला और धूमल के करीबी नरेंद्र बरागटा को मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी।

नाहन से नड्डा के करीबी माने जाने वाले राजीव बिंदल को बाहर रखने के लिए उन्हें विधानसभा अध्यक्ष का पद देकर राहत दी गई, जबकि बरागटा और धवाला का बाहर होना धूमल और शांता खेमे के लिए झटका है। 

कपूर को अंतिम समय में लिया
पार्टी ने 10 मंत्रियों को ही शपथ दिलाने का निर्णय लिया था, जिसमें किशन कपूर का नाम अंतिम समय में जोड़ा गया। पार्टी की ओर से राजभवन को देर रात भेजी सूची में किशन कपूर नहीं थे। शांता कुमार के करीबी किशन कपूर का आखिरी समय में नाम संघ की सहमति के बाद जुड़ा।

हालांकि, मंगलवार देर रात पीटरहॉफ पहुंचे शांता ने उनके नाम शामिल करने की पैरोकारी की। पार्टी केवल तीन मंत्री ही कांगड़ा से रखना चाहती थी, लेकिन कपूर को लेकर बन रहे दबाव के बाद पार्टी ने कांगड़ा संसदीय क्षेत्र का कोटे में सुबह 10 बजे उनका नाम राजभवन गया।

संसदीय क्षेत्रों का भी साधा समीकरण
पार्टी में खेमेबाजी को साधने के लिए संसदीय क्षेत्रों का दांव भी खेला है। हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से तीन मंत्री, जबकि हमीरपुर जिले से कोई मंत्री नहीं बना है। कांगड़ा जिले का जसवां परागपुर और मंडी का धर्मपुर भी हमीरपुर संसदीय क्षेत्र का है।

ऐसे में धूमल के बेटे सांसद अनुराग के पास आपत्ति जताने का कोई विकल्प नहीं बचा। कांगड़ा को चार मंत्री देने के लिए भी यही दांव चला गया। मंडी संसदीय क्षेत्र से तीन मंत्री और एक मुख्यमंत्री मिला। शिमला संसदीय क्षेत्र से दो ही मंत्री बने।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें