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अंधविश्वास में फंसे मंत्री, सचिवालय के इस कमरे में बैठने से लग रहा डर

Fri, 29 Dec 2017 02:31 PM IST
सुरेश शांडिल्य/अमर उजाला, शिमला
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बेशक विज्ञान ने बहुत तरक्की कर ली हो और शिक्षा से आम लोगों का वैज्ञानिक दृष्टिकोण बन रहा हो, मगर हमारे कुछ मंत्री अभी तक अंधविश्वास से अछूते नहीं हैं। ये नवनियुक्त मंत्री राज्य सचिवालय में सौभाग्यदायी कमरों की खोज में भटक रहे हैं।
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सचिवालय के एलर्जली भवन में एक कमरा नंबर 202 है। इस कमरे से खूब पढ़े-लिखे मंत्री तक डरे हुए हैं। वजय से कि उन्होंने मन में ये बात बैठा ली है कि इसमें कार्यालय चलाने वाले मंत्री लगातार चुनाव हारते आ रहे हैं।

एलर्जली भवन शिमला को अंग्रेजों की सरकार ने अपने इस्तेमाल के लिए वर्ष 1886 में बनाया गया था। देश की आजादी और हिमाचल के बनने के बाद इसे राज्य सचिवालय में बदला गया।
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पिछली भाजपा सरकार में मंत्री रहे नरेंद्र बरागटा और हाल ही में चुनाव हार चुके कांग्रेेस सरकार के मंत्री रहे सुधीर शर्मा के पास भी 202 नंबर कमरा रहे हैं। 

दोनों नेता हार गए चुनाव

यहीं से इनके कार्यालय चले, मगर दोनों नेता ही अगला चुनाव हार गए। अब यह मिथक ही बन गया है कि जो भी मंत्री इस कमरे में दफ्तर चलाता है, वह अगला चुनाव हार जाता है। दोबारा मंत्री भी नहीं बन पाता।

ऐसे में पहले तो इस कमरे को लेने को भाजपा सरकार के ज्यादातर मंत्री तैयार नहीं हुए। एक मंत्री को पूछे बगैर ही सामान्य प्रशासन विभाग ने कमरा अलॉट किया तो उनके समर्थकों ने उन्हें डराना शुरू कर दिया कि वह भी वही गलती कर रहे हैं जो नरेंद्र बरागटा और सुधीर शर्मा ने की थी।

अभी भी संभल लेने का वक्त है। वरना नुकसान नहीं होगा। इन मंत्री महोदय को अब एक अन्य कमरा अलॉट किया जा रहा है। वर्तमान में ये कमरा एक प्रशासनिक अधिकारी के पास है। एक मंत्री के देहांत के बादसे इस कमरे को इन अधिकारी को दिया गया। 
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सता रही है गलत कमरा मिलने की चिंता

202 नंबर कमरे पर आपत्ति कर रहे ये मंत्री अब इस कमरे को लेने के लिए तो तैयार हो चुके थे कि फिर भी किसी ने उनके मन में ये वहम डाल दिया है कि इस कमरे में कार्यालय चलाने वाले एक मंत्री अपने कार्यकाल में ही दुनिया से ही विदा हो लिए।

अब ये मंत्री दोबारा तनाव में हैं। खास बात ये है कि ये मंत्री महोदय अन्य मंत्रियों की तुलना में बहुत पढ़े-लिखे भी हैं, मगर किसी भी तरह की कमी रखने से डर रहे हैं।

इससे उनका मन उच्चाटित सा हो गया है। वीरवार को इन मंत्री से उनकी इस उलझन पर बात करने की कोशिश की गई, लेकिन वे खुद को बहुत व्यस्त बताते रहे। पोर्टफोलियो से ज्यादा उन्हें गलत कमरा मिलने की चिंता सता रही थी। 
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