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Himachal Budget 2026-27: नशे पर वार, खेल के लिए तैयार; खेलो हिमाचल-चिट्टा मुक्त अभियान शुरू करने का एलान

Sun, 22 Mar 2026 12:09 PM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

Himachal Budget News In Hindi: हिमाचल प्रदेश में चिट्टा जैसे नशे के खिलाफ अभियान को तेज करने के लिए करीब 12 करोड़ रुपये से ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर तीन स्तरीय खेलो हिमाचल चैंपियनशिप आयोजित की जाएंगी। वहीं, राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्टअप योजना, 2023 के तहत युवाओं को ई-टैक्सी खरीदने पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है।
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Himachal Budget 2026-27 - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश सरकार ने युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और नशामुक्त, स्वस्थ और सशक्त समाज के निर्माण के लिए वर्ष 2026-27 में खेलो हिमाचल-चिट्टा मुक्त अभियान शुरू करने का ऐलान किया। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को नशे, विशेषकर चिट्टा जैसी घातक प्रवृत्ति से दूर कर खेलों से अनुशासन, प्रतिस्पर्धा और सकारात्मक जीवनशैली की ओर प्रेरित करना है।

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अभियान के तहत करीब 12 करोड़ रुपये से ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर तीन स्तरीय खेलो हिमाचल चैंपियनशिप आयोजित की जाएंगी। इनमें वॉलीबाल, कबड्डी और क्रिकेट जैसे खेल शामिल होंगे। प्रतियोगिताओं में 15 से 30 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 50 हजार युवा भाग लेंगे। इसके लिए एक विस्तृत खेल कैलेंडर तैयार किया जाएगा। इसके आधार पर नियमित प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इस कार्यक्रम को ग्रामीण विकास, युवा सेवाएं एवं खेल विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से संचालित करेंगे।

नादौन में बहुउद्देश्यीय खेल परिसर होगा तैयार
  • सरकार ने हमीरपुर जिले के नादौन क्षेत्र के खरीड़ी में बहुउद्देश्यीय खेल परिसर को राज्य स्तरीय उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने की भी घोषणा की है।
  • इस अत्याधुनिक परिसर में शूटिंग, स्विमिंग, कुश्ती, टेबल टेनिस सहित अंतरराष्ट्रीय मानकों के खेलों की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। साथ ही टेनिस, योग, बॉक्सिंग, कबड्डी, बैडमिंटन, वॉलीबाल, जूडो, बास्केटबाल, हॉकी और एथलेटिक्स जैसे खेलों के लिए इनडोर एरेना, आवासीय सुविधा, खेल विज्ञान, फिटनेस एवं रिकवरी सेंटर, पेशेवर कोचिंग और प्रशिक्षण की व्यवस्था होगी।

2026 तक स्टेडियम शुरू करने का लक्ष्य
नादौन के खरीड़ी में बहुउद्देश्यीय परिसर प्रतिभा पहचान, दीर्घकालिक खिलाड़ी विकास और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण का केंद्र बनेगा। सरकार का लक्ष्य इसे वर्ष 2026 तक आम जनता और खिलाड़ियों को समर्पित करना है। इससे प्रदेश राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के आयोजन का प्रमुख केंद्र बन सके।
 

2036 ओलंपिक पर होगा फोकस
ओलंपिक 2036 को ध्यान में रखते हुए 10 से 12 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की प्रतिभा पहचान और उनके प्रशिक्षण के लिए विशेष कार्यक्रम भी चलाया जाएगा, जिससे प्रदेश के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
 

कुटासनी, घुमारवीं और कल्पा स्टेडियमों का काम करेंगे पूरा 
प्रदेश सरकार की ओर से कल्पा, घुमारवीं और कुटासनी के स्टेडियमों का निर्माण कार्य भी शीघ्र पूरा करने का लक्ष्य रखा है। सरकार ने खेल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और भविष्य के चैंपियनों को तैयार करने के लिए व्यापक नीति पहल की भी घोषणा की है।
 

500 कैंपस इंटरव्यू, एक हजार को विदेश में नौकरी
सरकार ने युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए घोषणाएं की हैं। रोजगार सृजन को प्राथमिकता देने के लिए बड़े स्तर पर कैंपस इंटरव्यू आयोजित किए जाएंगे।

वर्ष 2026-27 में 500 कैंपस साक्षात्कार आयोजित किए जाएंगे। इससे युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें। इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन को विदेश मंत्रालय के साथ भर्ती एजेंट के रूप में पंजीकृत करवाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके माध्यम से प्लेसमेंट ड्राइव आयोजित कर युवाओं को विदेशी रोजगार के अवसरों के प्रति जागरूक किया जाएगा। सरकार ने इस दौरान एक हजार युवाओं को विदेशों में रोजगार दिलाने का लक्ष्य है।

50% सब्सिडी ई-टैक्सी खरीदने पर 
राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्टअप योजना, 2023 के तहत युवाओं को ई-टैक्सी खरीदने पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। इस योजना को वर्ष 2026-27 में भी जारी रखते हुए 500 युवाओं को इसका लाभ दिया जाएगा। इसके लिए सरकार ने 50 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान रखा है। साथ ही, ई-टैक्सी लाभार्थियों को मिलने वाले मासिक भुगतान में 5 हजार रुपये की बढ़ोतरी भी की गई है, जिससे उनकी आय में सुधार होगा। इसी क्रम में सरकार ने 500 युवाओं को ई-रिक्शा खरीदने के लिए भी 50 प्रतिशत पूंजीगत सब्सिडी देने की घोषणा की है। यह सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के खातों में डीबीटी के माध्यम से दी जाएगी, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी और सरल बनेगी।

दिव्यांगों को राहत : पेंशन 1700 से 3000 रुपये
प्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सामाजिक कल्याण क्षेत्र को मजबूत करने के लिए 100 प्रतिशत दिव्यांगजनों को दी जा रही सामाजिक सुरक्षा पेंशन को 1700 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा की है। वर्तमान में प्रदेश में करीब 7 हजार लाभार्थी इस श्रेणी में आते हैं। सरकार का मानना है कि गंभीर दिव्यांगता वाले व्यक्तियों की आवश्यकताओं को देखते हुए यह बढ़ोतरी आवश्यक थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसिक बीमारी से ठीक हो चुके लेकिन परिवार द्वारा स्वीकार नहीं किए गए व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए प्रदेश में मौजूदा दो हाफ-वे होम के अलावा दो नए हाफ-वे होम स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक हाफ वे होम की क्षमता 25 निवासी होगी। रखरखाव के लिए सहायता अनुदान 90:10 अनुपात रहेगा। उन्हें 50 लाख रुपये वार्षिक पुनरावर्ती और 10 लाख रुपये गैर आवर्ती के मद में व्यय करने की अनुमति होगी। ये संस्थान सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के माध्यम से अनुमोदित संस्थाओं द्वारा संचालित किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य ऐसे व्यक्तियों को सम्मानजनक जीवन और समाज में पुनर्स्थापन का अवसर देना है। 

50 सीटें दृष्टिबाधितों की सुंदरनगर में बढ़ाईं जाएंगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुंदरनगर स्थित दृष्टिबाधित और श्रवणबाधित बालिकाओं के लिए राज्य के एकमात्र सरकारी संस्थान की क्षमता 150 से बढ़ाकर 200 सीटें की जाएंगी। इस निर्णय से 50 अतिरिक्त बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, छात्रावास सुविधा और विशेष देखभाल उपलब्ध हो सकेगी। बजट में सामाजिक कल्याण को केवल सहायता तक सीमित न रखकर पुनर्वास, शिक्षा और संस्थागत ढांचे के विस्तार से जोड़ा गया है। पेंशन वृद्धि और नए संस्थानों की स्थापना से सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि कमजोर वर्गों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए दीर्घकालिक रणनीति अपनाई जा रही है। 

ई-आवंटन से बढ़ेगी पारदर्शिता
राज्य की आर्थिक व्यवस्था को सुदृढ़, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में राज्य कर एवं आबकारी विभाग ने आगामी वित्त वर्ष के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री की ओर से रखे गए प्रस्तावों के अनुसार अब शराब की खुदरा दुकानों के आवंटन की पूरी प्रक्रिया ई-आवंटन के माध्यम से की जा रही है। इससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और मनमानी की गुंजाइश खत्म होगी। इसी कड़ी में टोल बैरियरों का आवंटन भी वर्ष 2026-27 के लिए ई-आवंटन प्रक्रिया के तहत पूरा कर लिया गया है। डिजिटल माध्यम से आवंटन की पहल राजस्व संग्रह को बढ़ाने के साथ-साथ भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगाएगी। इसके अलावा, राज्य कर एवं आबकारी विभाग द्वारा जीएसटी प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक नई पहल शुरू की जा रही है।

जीएसटी के लिए विशेष अभियान 
भाग त्रैमासिक आधार पर एक सप्ताह का जीएसटी करदाता स्वैच्छिक अनुपालन जागरूकता अभियान चलाएगा। इस अभियान के तहत करदाताओं को जीएसटी कानूनों और प्रक्रियाओं की जानकारी दी जाएगी तथा उन्हें स्वेच्छा से नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य इस पहल के माध्यम से न केवल करदाताओं में जागरूकता बढ़ाना है, बल्कि स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा देकर कर विवादों में कमी लाना भी है। साथ ही एक पारदर्शी और भरोसेमंद जीएसटी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा। 

गांवों की महिलाओं के लिए तीन लाख तक ऋण
प्रदेश सरकार ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बजट में कई अहम घोषणाएं की हैं। सरकार सामाजिक सुरक्षा, महिला बाल एवं अन्य पिछड़ा वर्ग पर 544 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। सरकार को उम्मीद है कि इससे इनका उत्थान होगा।

ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री महिला सशक्तीकरण योजना के तहत स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों की पात्र महिलाओं, जिनके परिवार की वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक नहीं है, को हिमाचल प्रदेश महिला विकास निगम के माध्यम से अनुसूचित बैंकों की ओर से तीन लाख रुपये तक का ऋण दिया जाएगा। यह ऋण डेयरी, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, फूड प्रोसेसिंग, सिलाई, बुटिक और ब्यूटी पार्लर जैसे स्वरोजगार से जुड़े कार्यों के लिए दिया जाएगा। इस ऋण पर देय ब्याज का 4 प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

स्वाभिमान योजना बनेगी
सरकार ने यौन शोषण की शिकार बालिकाओं और महिलाओं के पुनर्वास के लिए भी नई पहल की है। वर्तमान में महिला एवं बाल विकास निदेशालय द्वारा संचालित योजना, जिसके तहत पीड़ितों को वित्तीय सहायता दी जाती है, उसके कार्यान्वयन में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए अब नई स्वाभिमान योजना शुरू की जाएगी।
 

प्रतिष्ठित संस्थानों में निराश्रितों की पढ़ाई का खर्च भी उठाएगी सरकार
सरकार ने निराश्रित, परित्यक्त महिलाओं और दिव्यांग माता-पिता के बच्चों की शिक्षा को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना के तहत लाभार्थियों को और अधिक राहत मिलेगी।
 

वर्तमान में योजना का लाभ लगभग 22 हजार लाभार्थियों को मिल रहा है। यह सुविधा अभी तक केवल प्रदेश के सरकारी शिक्षण संस्थानों तक ही सीमित थी।  इसको ध्यान में रखते हुए सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 से योजना का दायरा बढ़ाया जाएगा। अब पात्र महिलाओं और दिव्यांग माता-पिता के ऐसे सभी बच्चे, जो प्रदेश से बाहर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भारतीय प्रबंधन संस्थान, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान और राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित सरकारी संस्थानों में प्रवेश प्राप्त करेंगे, उनके लिए पाठ्यक्रम शुल्क, छात्रावास शुल्क और मैस शुल्क सहित संपूर्ण खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस फैसले से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को बेहतर अवसर मिलेंगे और वे उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्राप्त कर अपने भविष्य को संवार सकेंगे। 

भुगतान का स्पष्ट रोडमैप नहीं
कर्मचारियों के बकाया भुगतान ( एरियर और डीए, पेंशन की देनदारियों ) को लेकर कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं। बजट एक विरोधाभास दिखाता है। एक तरफ वित्तीय संकट की स्वीकार्यता, दूसरी तरफ ठोस सुधारात्मक कदमों का अभाव। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार राजनीतिक और सामाजिक दबाव के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन स्ट्रक्चरल फाइनेंशियल रिफॉर्म्स से बच रही है।
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गरीब, जरूरतमंद और कमजोर वर्गों के हितों को ध्यान में रखकर बना बजट 
राज्य सरकार के बजट को गरीब, जरूरतमंद और कमजोर वर्गों के हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह संतुलित बजट है। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद सरकार ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को प्राथमिकता देकर प्रतिबद्धता साबित की है। बजट में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। इसके साथ ही वृद्धजन, दिव्यांगजन और समाज के कमजोर वर्गों के लिए चलाई जा रही योजनाओं को निरंतर जारी रखने पर जोर दिया गया है। सरकार का फोकस केवल योजनाएं घोषित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना भी है। - डॉ. धनीराम शांडिल, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री
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