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Himachal Budget 2024: छह हजार प्री प्राइमरी शिक्षक होंगे भर्ती, जानें किस क्षेत्र के लिए क्या घोषणा हुई

Sat, 17 Feb 2024 08:18 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला

सार

हिमाचल प्रदेश के बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि-बागवानी, पशुपालन सहित अन्य क्षेत्रों के लिए कई बड़ी घोषणाएं की गई हैं। 
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पेश किया बजट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में इस वर्ष छह हजार प्री प्राइमरी शिक्षक भर्ती किए जाएंगे। पात्र आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी शिक्षक बनने का अवसर मिलेगा। इसके लिए इन्हें ब्रिज कोर्स भी करवाया जाएगा। बीते कई वर्षों से प्री प्राइमरी शिक्षकों की भर्ती लटकी है। प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र की मजबूती के लिए सबसे ज्यादा 9,560 कराेड़ रुपये के बजट का मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बजट भाषण में एलान किया। शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने बजट भाषण में कहा कि इस वर्ष 850 शिक्षण संस्थानों को इंस्टीट्यूट ऑॅफ एक्सीलेंस का दर्जा दिया जाएगा। 500 प्राइमरी, 100 हाई, 200 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों और 50 कॉलेजों को इसमें शामिल किया जाएगा। इन संस्थानों में शिक्षकों के सभी स्वीकृत पदों को भरने के साथ स्मार्ट क्लास रूम तथा अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी।

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तय मापदंडों के आधार पर इन संस्थानों का मूल्यांकन करवाया जाएगा। प्रदेश के सभी स्कूल और कॉलेजों के प्रिंसिपल और हेडमास्टर शिक्षा के क्षेत्र में आवश्यक नेतृत्व दें, इसके लिए स्कूल-कॉलेज लीडरशीप प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूलों और समाज के बीच बेहतर तालमेल के लिए तथा सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने के लिए अपना विद्यालय-मेरा विद्यालय-मेरा योजना शुरू की जाएगी। इसके तहत मुख्यमंत्री से लेकर खंड स्तर के अधिकारी एक-एक शिक्षण संस्थान को गोद लेंगे। समुदाय को स्कूलों से जोड़ने के लिए यह फैसला लिया गया है। इसके तहत पात्र एवं इच्छुक व्यक्तियों द्वारा निशुल्क शिक्षा देने में सहयोग दिया जाएगा। सरकार ने हर माह एक स्कूल का निरीक्षण कर विद्यार्थियों-शिक्षकों की कार्यशैली की समीक्षा करने का जिम्मा उपमंडल अधिकारियों को सौंपा है। इसके तहत अभिभावकों के साथ भी संवाद किया जाएगा। बैठक में स्कूलों के रखरखाव को लेकर भी निर्णय लिए जाएंगे।

सामान्य पाठकों के लिए 500 स्कूलों में बनेंगे रीडिंग रूम
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षण संस्थानों की अब वार्षिक रैंकिंग भी होगी। प्रदर्शन के आधार पर ही स्कूलों को ग्रांट दी जाएगी। ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से यह प्रक्रिया चलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों के प्रशिक्षण की प्रक्रिया को मजबूत करने के डाइट और एससीईआरटी के नियमों में बदलाव किया जाएगा। शिक्षकों से लिए जाने वाले गैर शिक्षण कार्यों को कम किया जाएगा। प्रदेश में इस वर्ष पढ़ो हिमाचल अभियान के तहत सामान्य पाठकों के लिए 500 स्कूलों में रीडिंग रूम बनाए जाएंगे। इन्हीं शिक्षण संस्थानों के पुस्तकालयों के चलाने में आम जन की भागीदारी को सुनिश्चित किया जाएगा। पढ़ने-पढ़ाने की संस्कृति के विकास के लिए सरकार ने जन अभियान को शुरू करने का फैसला लिया है।

लड़के-लड़कियों के अलग-अलग स्कूल और कॉलेज किए जाएंगे एक
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन स्थानों पर लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग स्कूल या कॉलेज चल रहे हैं, उन्हें स्थानीय निवासियों की मांग पर मिलाकर एक शैक्षणिक संस्थान बनाया जा सकेगा। इससे छात्र और छात्राओं के शैक्षणिक विकास के साथ उनका मनोवैज्ञानिक विकास और व्यक्तित्व विकास होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन क्षेत्रों में तीन से पांच किलोमीटर के दायरे में कोई भी कोई प्राथमिक शिक्षा विद्यालय न हो, वहां के बच्चों को नजदीक के स्कूल तक लाने और वापस घर छोड़ने की व्यवस्था सरकार करेगी।

8.50 लाख विद्यार्थियों को मिलेगी पानी की बोतल, पांचवीं से पढ़ाया जाएगा हिमाचल का इतिहास, संस्कृति, सामान्य ज्ञान
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 8.50 लाख विद्यार्थियों को स्वच्छ जल के लिए पानी की बोतल दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के दो तिहाई जिले पानी की कमी से जूझ रहे हैं। बच्चों को मुख्यमंत्री ने कहा कि पांचवीं से हिमाचल के इतिहास एवं संस्कृति, भारतीय संविधान, स्वास्थ्य, बैसिक हाईजिन तथा अन्य सामान्य ज्ञान के विषयों को पढ़ाया जाएगा। अनिवार्य रूप से इन विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। स्कूलों में खेलों और व्यायाम के लिए प्रतिदिन कम से कम एक पीरियड अनिवार्य किया जाएगा। जरुरत के हिसाब से फिजिकल एजुकेशन शिक्षकों को भी नियुक्त किया जाएगा।


 

दस राजीव गांधी डे बोर्डिंग स्कूल खुलेंगे
500 बच्चों से अधिक संख्या वाले स्कूलों में स्वयं सहायता समूहों को मिड डे मील के तहत भोजन बनाने और परोसने में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। 2024-25 में नैक की मान्यता लेने के लिए प्रदेश के सभी कॉलेजों द्वारा दावेदारी प्रस्तुत की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में दस राजीव गांधी डे बोर्डिंग स्कूल खोले जाएंगे। कांगड़ा में लाहड़ू और नगरोटा बगवां, हमीरपुर में अमलेहड़ और भोरंज और ऊना में संगनाई सहित पांच अन्य जगह भी यह स्कूल खोले जाएंगे। पूर्व सरकार की अटल आदर्श विद्यालय योजना के तहत भी तीन स्कूल बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन दोनों प्रकार के स्कूलों में कर्मचारियों का एक अलग कैडर बनाया जाएगा। संस्थानों को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर उत्कृष्ट शिक्षा संस्थानों के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत सरकार को वित्त पोषण के लिए सरकार ने विभिन्न प्रस्ताव भेजे हैं। समग्र शिक्षा अभियान के तहत एक हजार 52 करोड़ तथा स्टार्स प्रोजेक्ट के तहत 400 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है। पीएम ऊषा के तहत एक हजार करोड़, पीएम श्री के तहत 477 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भी केंद्र सरकार को भेजा है।

पर्यटन से जुड़ेगी बागवानी
सरकार ने इस साल सेब की पैकिंग के लिए यूनिवर्सल कार्टन को प्रभावी तरीके से लागू करने की घोषणा की है। बागवान संगठन लंबे समय से यूनिवर्सल कार्टन लागू करने की मांग उठा रहे हैं। यूनिवर्सल कार्टन लागू होने के बाद बागवानों को सेब के पेटियों में 4 से 6 किलो अतिरिक्त सेब नहीं देना पड़ेगा। क्षमता के अनुसार सेब की पैकिंग से गुणवत्ता भी प्रभावित नहीं होगी और उपज के अच्छे दाम मिलेंगे। बजट में सरकार ने बागवानी को पर्यटन के साथ जोड़ने की भी घोषणा की है। हार्टीकल्चर टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए सेब के बड़े बगीचों में सैलानियों को घूमने की सुविधा दी जाएगी। देश में फार्म स्टे को लेकर पर्यटकों की बढ़ती रुचि को देखते हुए ग्रामीण विकास विभाग, उद्यान विभाग और पर्यटन विभाग संयुक्त रूप से नीति बनाएंगे। इच्छुक बागवानों को प्रशिक्षण और सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई जाएंगी। 2024-25 में 300 करोड़ की लागत से 75 लघु सिंचाई योजनाएं, एक हजार 200 हेक्टेयर में उपोष्ण कटिबंधीय फल (सब ट्रोपिकल) फलों के उच्च घनत्व पौधे रोपित होंगे, जिससे 80 किसान समूहों के 6500 किसान परिवार लाभान्वित होंगे। 12 करोड़ की लागत से बागवानी उत्कृष्टता केंद्र स्थापित होगा और दो फ्रूट प्रोसेसिंग यूनिट भी लगाए जाएंगे।

 

तकनीकी शिक्षा
शिमला। प्रदेश के युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर देने के लिए सरकार ने इंजीनियरिंग और बहुतकनीकी संस्थानों में नए कोर्स शुरू करने का भी फैसला लिया है। राजीव गांधी राजकीय इंजीनियरिंग काॅलेज नगरोटा बगवां में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एंड डाटा साइंस) में बीटेक और डिप्लोमा कोर्स शुरू किए जाएंगे। राजकीय बहुतकनीकी संस्थान हमीरपुर तथा तलवाड़ में कंप्यूटर इंजीनियरिंग और आईओटी में डिप्लोमा कोर्स शुरू किया जाएगा। राजकीय बहुतकनीकी संस्थान सुंदरनगर में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एंड मशीन लर्निंग) का डिप्लोमा कोर्स शुरू होगा। अटल बिहारी वाजपेयी राजकीय इंजीनियरिंग काॅलेज प्रगतिनगर में सिविल इंजीनियरिंग के बीटेक और डिप्लोमा कोर्स शुरू किए जाएंगे। राजकीय बहुतकनीकी संस्थान जंडौर में शैक्षणिक सत्र 2024-25 से कक्षाएं आरंभ कर दी जाएंगी। तकनीकी शिक्षा क्षेत्र में कुल 330 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है।असंगठित क्षेत्र के कामगारों के हितों को ध्यान में रखते हुए 2024 के अंत तक 20 लाख 87 हजार कामगारों को पंजीकृत करने का लक्ष्य है। इसके अतिरिक्त श्रम और रोजगार विभाग की रोजगार पंजीकरण पोर्टल को कॉमन सर्विस सेंटर के साथ भी लिंक किया जाएगा ताकि प्रदेश के युवा इन केंद्रों के माध्यम से पंजीकरण करवा सकें।

खेल एवं युवा सेवाएं
 प्रदेश सरकार युवाओं को खेलों के लिए प्रोत्साहित करने के लिए 2024-25 में नई खेल नीति बनाएगी। शनिवार को विधानसभा सदन में बजट भाषण में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने ओलंपिक, एशियन और कॉमनवेल्थ खेल विजेताओं को दी जाने वाली पुरस्कार राशि में भी बढ़ोतरी करने की भी घोषणा की। ओलंपिक में व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने पर पुरस्कार राशि को 3 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये, रजत पदक के लिए 2 करोड़ से बढ़ाकर 3 करोड़ रुपये तथा कांस्य पदक के लिए 1 करोड़ से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये किया है। एशियन खेलों में व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक प्राप्त करने पर पुरस्कार राशि को 50 लाख से बढ़ाकर 4 करोड़ रुपये, रजत पदक के लिए 30 लाख से बढ़ाकर 2.05 करोड़ रुपये तथा कांस्य पदक के लिए 20 लाख से बढ़ाकर 1.03 करोड़ रुपये किया। कॉमनवेल्थ में व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक प्राप्त करने पर पुरस्कार राशि को 50 लाख से बढ़ाकर 3 करोड़ रुपये, रजत पदक के लिए 30 लाख से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये तथा कांस्य पदक के लिए 20 लाख से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये किया। उन्होंने कहा कि टीम स्पर्धाओं में विजेता हिमाचली खिलाड़ियों को प्राप्त पदक के आधार पर उपरोक्त पुरस्कार राशि में से प्रत्येक खिलाड़ी को प्रतिनिधित्व के अनुपात में बराबर बांटा जाएगा। 
 

नौ इंडोर खेल स्टेडियम और परिसर खुलेंगे
राज्य से 200 किलोमीटर की दूरी वाले स्थानों में हवाई जहाज से सफर कर खिलाड़ी खेलने जाएंगे। 200 किलोमीटर से कम दूरी पर एसी थ्री टायर की सुविधा दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट खिलाड़ियों को विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए तय तीन फीसदी कोटे में वर्तमान 43 खेलों की संख्या बढ़ाने का भी ऐलान किया। खेल हॉस्टलों में रहने वालों और प्रदेश में होने वाली खेल प्रतियोगिताओं में शामिल होने पर 400 रुपये डाइट मनी देने का एलान किया। प्रदेश से बाहर खेलने के लिए जाने वाले विद्यार्थियों को 500 रुपये डाइट मनी की घोषणा की। प्रारंभिक स्तर के खिलाड़ियों को प्रदेश में होने वाली खेलों में भाग लेने पर 250 रुपये प्रतिदिन दिए जाएंगे। अन्य सभी खिलाड़ियों को प्रदेश में होने वाली खेलों में भाग लेने पर 400 रुपये प्रतिदिन दिए जाएंगे। प्रदेश के बाहर होने वाली खेलों में भाग लेने पर समान रूप से 500 रुपये प्रतिदिन दिए जाएंगे। प्रदेश के खेल हाॅस्टलों में रहने वाले सभी खिलाड़ियों को 250 रुपये तथा 400 रुपये की डाइट मनी दी जाएगी। हमीरपुर में आधुनिक सुविधाओं से युक्त इंडोर स्टेडियम का निर्माण होगा। ऊना के पंजोआ और मनाली बंदरोल में एक इंडोर स्पोट्र्स स्टेडियम का निर्माण होगा। जिला कांगड़ा के रैहन और देहरा में स्विमिंग पूल सुविधा के साथ इंडोर स्टेडियम का निर्माण होगा। खरीड़ी नादौन, कसुम्पटी जयसिंहपुर और शिमला के ढली बाईपास में इंडोर बहुउद्देषीय खेल परिसर का निर्माण किया जाएगा।

हरित ऊर्जा
हिमाचल प्रदेश को वर्ष 2026 तक देश का पहला हरित ऊर्जा राज्य बनाने के लिए सरकार ने सोलन, पालमपुर और धर्मशाला नगर निगम में नये भवनों में सोलर वॉटर हीटर हीटिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य कर दिया है। मुख्यमंत्री ने घरेलू उपभोक्ताओं को एनओसी लेने के लिए यह नई शर्त लगा दी है। इन नगर निगमों में स्थित सरकारी भवनों की छत्तों पर चरणबद्ध तरीके से सोलर प्लांट लगाए जाएंगे। शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने बजट भाषण के दौरान कहा कि ऊना, कांगड़ा, सोलन, सिरमौर, मंडी और शिमला में 501 मेगावाॅट की क्षमता वाले पांच सौर पार्क और 212 मेगावॉट की क्षमता वाली सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करने का कार्य आरंभ किया जाएगा। सभी सरकारी भवनों के लोड के कम से कम 20 प्रतिशत की आपूर्ति ग्रिड से जुड़े रूफ टॉप सोलर प्लांट के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से करना अनिवार्य किया जाएगा। प्रदेश के बाल एवं बालिका आश्रमों तथा वृद्ध आश्रमों और राजीव गांधी मॉडल डे बोर्डिंग स्कूलों में ग्रिड से जुड़े रूफ टॉप सोलर प्लांट और वाटर हीटिंग सिस्टम स्थापित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि निजी भूमि पर स्थापित होने वाली सौर ऊर्जा परियोजनाओं का पंजीकरण पूरे वर्ष के लिए खुला रखा जाएगा। इससे 100 मेगावॉट सौर क्षमता का दोहन जल्द संपन्न हो जाएगा। ऊना के भंजाल में पांच मेगावॉट क्षमता वाले सोलर पॉवर प्रोजेक्ट का सितंबर 2024 तक लोकार्पण कर दिया जाएगा। ऊना में अघलोर स्थित 10 मेगावॉट क्षमता वाला सोलर पावर प्लांट जून 2024 तक बनकर तैयार कर दिया जाएगा। पेखुवाला स्थित 32 मेगावाट क्षमता वाले हिमाचल के सबसे बड़े सोलर पॉवर प्रोजेक्ट को मार्च 2024 तक शुरू कर दिया जाएगा। लारजी पावर हाउस के दो यूनिटों को भी जल्द रिस्टोर कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी स्टार्ट अप योजना के तहत प्रथम चरण में कुल 100 मेगावाट सोलर क्षमता का दोहन सुनिश्चित किया जाएगा।

बिजली नुकसान कम करने को बनेगी कार्ययोजना
 प्रदेश में एक हजार 885 करोड़ रुपये की वितरण क्षेत्र योजना के तहत बिजली के नुकसान को कम करने के लिए सरकार विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेगी। इससे बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता बढ़ेगी और वित्तीय नुकसान भी कम होगा। इसके अलावा सरप्लस बिजली को उचित समय पर अन्य राज्यों को पहुंचाने के लिए 96 करोड़ की लागत से चार ट्रांसमिशन लाइन तथा 290 करोड़ रुपये की लागत से छह एक्सट्रा हाई वोल्टेज सब स्टेशन तैयार किए जाएंगे।

जल शक्ति विभाग
 मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने किन्नौर, चंबा, और लाहौल-स्पीति में 29 करोड़ रुपये की लागत से चार एंटी फ्रिज पेयजल परियोजनाओं को पूरी करने का लक्ष्य रखा है। एनडीबी के माध्यम से 186 पेयजल योजनाएं की जा रही हैं। इससे 20, 663 परिवार लाभान्वित होंगे। ज्वाली, हमीरपुर, पपरोला और नेरचौक में 135 लीटर पर कैप्टा पर डे की क्षमता वाली पेयजल योजनाओं का काम होगा। अंब, भुंतर के लिए 33 करोड़ रुपये से पेयजल योजनाओं को गति मिलेगी।  112 करोड़ की लागत से नाहन, अर्की, निरमंड, पालमपुर और जोगिंद्रनगर के लिए पेयजल योजनाओं में सुधार होगा। चौबीस घंटे पानी दिए जाने को लेकर रामपुर वार्ड 6, 7 और नालागढ़ और चंबा में पेयजल योजनाओं का काम शुरू, अन्य 9 शहरों में कार्य होंगे आरंभ।  हिमाचल में पेयजल योजनाओं में सुधार होगा। इसके लिए स्थानीय महिलाओं की भागीदारी से विलेज वाटर एंड सेनिटेशन कमेटी गठित होगी। अब तक प्रदेश में 69 टेस्टिंग लैब स्थापित की गई है। गगरेट डलहौजी, चुवाड़ी, रिवालसर, भोटा, संतोषगढ़, पपरोला, नेरचौक, राजगढ़, बंजार, चौपाल, नेरवा, और शाहपुर में सीवरेज परियोजनाओं के काम 2024-25 में पूरे कर लिए जाएंगे। 16 ग्रामीण क्षेत्रों में सीवरेज परियोजनाओं के कार्य अवार्ड किए जाएंगे। एएफडी द्वारा 817 करोड़ से स्वीकृत परियोजना के तहत मनाली, पामलपुर, नाहन, करसोग और बिलासपुर के लिए सीवरेज ट्रिटमेंट प्लांट और मनाली के लिए जल पेयजल योजना स्वीकृत की गई है।  कृषि सिंचाई योजना के तहत स्वीकृत चार योजनाओं में से लाबरंग मार्डन कालोनी और पूह के लिए स्वीकृत योजना को पूरा करने के लिए 53 लाख होंगे उपलब्ध करवाए जाएंगे। 644 करोड़ की फिन्नासिंह बहुउद्देश्य सिंचाई परियोजना पर 4 हजार 25 हेक्टेयर का सीसीए उपलब्ध होगा। इसके साथ ही 1.88 मेगावाट जल विद्युत का उत्पादन होगा। केंद्र की मदद से इस योजना को गति मिलेगी।

हिमाचल में बनेगी नई उद्योग नीति, एक ही विंडो से मिलेंगी सभी स्वीकृतियां
 प्रदेश में उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए औद्योगिक प्रोत्साहन व निवेश नीति 2024 लाई जाएगी। इसमें उद्योगों को सभी स्वीकृतियां एक ही विंडो से मिल जाएगी। इसमें निवेशक और अधिक निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। युवाओं को उद्योगों के जरिये स्वरोजगार के लिए स्टार्टअप नीति 2024 लाई जाएगी। इस नीति के तहत महिलाओं को स्टार्टअप स्थापित करने के लिए एक वर्ष के लिए अधिकतम चार लाख की सहायता दी जाएगी। आपदा के दौरान उद्योगों पर बढ़ाई गई इलेक्ट्रसिटी ड्यूटी को लेकर सरकार ने हिमाचल प्रदेश औद्योगिक नीति 2019 के तहत लगे उद्योगों को बढ़ी हुई इलेक्ट्रसिटी ड्यूटी से छूट की घोषणा की है। इन उद्योगों को इलेक्ट्रसिटी ड्यूटी को लेकर प्रमाण पत्र भी जारी किए गए हैं। अन्य उद्योगों को बढ़ी हुई दरों पर ही इलेक्ट्रसिटी ड्यूटी देनी होगी। अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए 10 साल बाद माइन एंड मिनरल पॉलिसी 2024 लाई जाएगी। औद्योगिक क्षेत्रों में अग्निशमन सेवाओं के लिए अलग मापमंड तय होंगे। उद्योगों की संख्या और किस्म के आधार पर आग से निपटने के लिए एसओपी बनाई जाएगी। आग पर काबू पाने के लिए आधुनिक तकनीके इस्तेमाल होंगी। बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्र के लिए 70 करोड़ की लगात से शीतलपुर से जगातखाना तक नई सड़क बनेगी जो मेडिकल डिवाइस पार्क ढेरोवाल को बद्दी औद्योगिक क्षेत्र से जोड़ेगी।

खाद्य आपूर्ति
 मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने राशनकार्ड उपभोक्ताओं को बाजार मूल्य से कम दामों पर शादी, त्योहार व अन्य समारोह के लिए तेल उपलब्ध कराने की घोषणा की है। एपीएल उपभोक्ताओं को डिपुओं में मिलने वाले दाम पर ही ये तेल उपलब्ध होगा। 1 अप्रैल 2024 से सभी उपभोक्ता अपनी आवश्यकतानुसार डिपो से तेल ले सकेंगे। इससे राज्य के उपभोक्ताओं को करीब 100 करोड़ रुपये का लाभ मिल सकेगा। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बजट भाषण में घोषणा की है कि राशन वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए आईएमपीडीएस सिस्टम को अपग्रेड किया जाएगा। एक राष्ट्र एक राशनकार्ड योजना के तहत पोर्टेबिलिटी को मजबूत किया जाएगा। मिलों से गोदामों तक आटे की निगरानी होगी। प्रदेश सरकार खाद्य उपदान पर 200 करोड़ रुपये से अधिक व्यय करेगी। सीएम सुक्खू ने घोषणा की कि पर्यावरण संरक्षण और सड़कों के निर्माण की लागत को कम करने के लिए 2024-25 में प्लास्टिक वेस्ट से 230 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण किया जाएगा। बर्फीले क्षेत्रों में कैल्शियम क्लोराइड और ब्राइन सोल्यूशन का प्रयोग किया जाएगा, ताकि इन सड़कों पर बर्फ न जमे। इससे संभावित दुर्घटनाओं को रोका जा सकेगा। 10 पंचायतों के 40 गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ा जाएगा। 

सैनिक कल्याण, सहकारी विभाग
 मुख्यमंत्री सुक्खू ने 60 वर्ष से अधिक आयु के ऐसे भूतपूर्व सैनिकों, जिनको और कोई पेंशन नहीं मिलती है उन्हें आर्थिक सहायक 3,000 से बढ़ाकर 5,000 रुपये प्रतिमाह मिलेगी। ये भी सुनिश्चत किया जाएगा कि विभिन्न विभागों में पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षित 15 फीसदी पदों को प्राथमिकता पर भरा जाएं। प्रदेश में सभी सहकारी सभाओं का ऑनलाइन पंजीकरण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले बजट में घोषित प्राथमिक कृषि सहकारी सभाओं के कंप्यूटरीकरण के अनुक्रम में इन्हें सहकारी बैंकों, सहकारिता विभाग तथा राष्ट्रीय डाटाबेस से जोड़ने का कार्य प्रगति पर है। इसे तय समय सीमा 2027 तक पूरा कर लिया जाएगा। 

दिव्यांगजनों की उच्च शिक्षा के लिए कंडाघाट में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
 हिमाचल प्रदेश में दिव्यांगजनों की उच्च शिक्षा के लिए कंडाघाट में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस खोला जाएगा। मुख्यमंत्री ने बजट भाषण में कहा कि प्रदेश में अभी तक दिव्यांगजनों की उच्च शिक्षा के लिए कोई भी शिक्षण संस्थान उपलब्ध नहीं है। ऐसे में नया एक्सीलेंस सेंटर खोलने का फैसला लिया गया है। राजधानी शिमला के ढली स्थित विशेष बच्चों के केंद्र को एक्सीलेंस सेंटर में शिफ्ट किया जाएगा। इस केंद्र में 0-27 वर्ष की आयु के दिव्यांग बच्चों के लिए आवासीय सुविधाएं, खेल मैदान और सभी अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। जिन पात्र दिव्यांग बच्चों के लिए रहने की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी, उन्हें रहने के लिए किराये के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी।

दिव्यांगजनों की उच्च शिक्षा के लिए कंडाघाट में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
 हिमाचल प्रदेश में दिव्यांगजनों की उच्च शिक्षा के लिए कंडाघाट में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस खोला जाएगा। मुख्यमंत्री ने बजट भाषण में कहा कि प्रदेश में अभी तक दिव्यांगजनों की उच्च शिक्षा के लिए कोई भी शिक्षण संस्थान उपलब्ध नहीं है। ऐसे में नया एक्सीलेंस सेंटर खोलने का फैसला लिया गया है। राजधानी शिमला के ढली स्थित विशेष बच्चों के केंद्र को एक्सीलेंस सेंटर में शिफ्ट किया जाएगा। इस केंद्र में 0-27 वर्ष की आयु के दिव्यांग बच्चों के लिए आवासीय सुविधाएं, खेल मैदान और सभी अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। जिन पात्र दिव्यांग बच्चों के लिए रहने की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी, उन्हें रहने के लिए किराये के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी।

इस वर्ष सामाजिक पेंशन में शामिल होंगे 40 हजार नए पात्र लाभार्थी
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में वृद्धावस्था, विधवा, एकल नारी, दिव्यांग, कुष्ठ रोगी तथा ट्रांसजेंडर पेंशन के 7 लाख 84 हजार लाभार्थियों के लिए लगभग 1260 करोड़ रुपये व्यय किए जा रहे हैं। वर्ष 2024-25 में 40 हजार नए पात्र लाभार्थियों को इस योजना में सम्मिलित किया जाएगा, इस पर लगभग 70 करोड़ रुपये अतिरिक्त व्यय किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़े वर्ग से संबंधित लाभार्थियों के लिए चलाए जा रहे पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन कंप्यूटर एप्लीकेशन और डिप्लोमा इन कंप्यूटर एप्लीकेशन कोर्स में बाजार मांग के अनुसार नए कोर्स भी करवाए जाएंगे। इसे जीएसडी, टैली, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा मैनेजमेंट, मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी कोर्स शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित लाभार्थियों को उचित रोजगार प्राप्त हो सकेगा।

शहरी विकास विभाग
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्राइवेट प्रोफेशनल हिमाचल में 500 वर्गमीटर तक के आवासीय नक्शों की स्वीकृति दे सकेंगे। ये स्वीकृति ऑटो डीसीआर के माध्यम से एक सिंगल पोर्टल के माध्यम से होगी। उन्होंने कहा कि राज्य स्तर पर शहरी विकास निदेशालय में एक पर्यावरण सेल स्थापित होगा। उन्होंने घोषणा की कि शहरी निकायों की कार्यप्रणाली डिजिटल होगी। इसके लिए राज्य स्तर पर स्टेट प्रोजेक्ट निगरानी यूनिट स्थापित की जाएगी। इस पहल से विभिन्न शुल्क, टैक्स ऑनलाइन एकत्र किए जा सकेंगे। शहरी निकायों की संपत्तियों की जीआईएस मैपिंग होगी।  मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि के नाम से महर्षि कामगार आवास योजना शुरू की गई है। वाल्मीकि रामायण के रचयिता थे और हाल ही में राम मंदिर का भी निर्माण किया गया है। उन्होंने कहा कि वाल्मीकि समाज के ऐसे सफाई कर्मचारियों जिनकी वार्षिक आय ढाई लाख रुपये से कम हो और उनके पास अपना घर न हो, उन्हें घर बनाने के लिए तीन लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी। नगर निगम धर्मशाला, सोलन, शिमला और नगर परिषद नालागढ, परवाणू में ईडब्ल्यूएस से संबंधित ऐसे व्यक्तियों को मकान आवंटित किए जाएंगे।
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5000 गांव होंगे खुले में शौच मुक्त
सरकार ने बजट में प्रदेश के 5000 गांवों को खुले में शौच मुक्त, ओडीएफ प्लस बनाने की घोषणा की है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में 1000 स्वयं सहायता समूह बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इन्हें 32 करोड़ रिवाल्विंग फंड और 50 करोड़ ऋण दिया जाएगा। स्वयं सहायता समूहों पर करीब 100 करोड़ खर्च होंगे। इसके अतिरिक्त सभी जिलों में एक मॉडल पंचायत बनेगी। ई-ग्राम स्वराज सॉफ्टवेयर से सभी पंचायतें जुड़ेंगी। पंचायतीराज संस्थाओं के लिए 352 करोड़ 15वें वित्तायोग की सिफारिशों के अनुरूप तथा 448 करोड़ छठे राज्य वित्तायोग के आधार पर खर्च होंगे।
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