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हिमाचली बागवान ने चीन-अमेरिका को पछाड़ा

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हिमाचल में युवा बागवान ने कड़ी मेहनत और आधुनिक तकनीक से प्रति हेक्टेयर सेब उत्पादन में अमेरिका और चीन को पीछे छोड़ दिया है। शिमला जिले के संजीव चौहान ने एक हेक्टेयर के बगीचे में 52 मीट्रिक टन सेब पैदा कर रिकार्ड बनाया है। हिमाचल में सेब की औसतन पैदावार 7 से 10 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर है।
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हिमाचल में वर्ष 2010-10 में सबसे अधिक 8 से 9 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर सेब उत्पादन हुआ है। विश्व में चीन सबसे अधिक 35 से 40 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर सेब उत्पादन करने वाला देश है। अमेरिका भी 32 से 35 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर पैदावार करता है। इस साल शिमला जिले के कोटखाई (बखोल) के युवा बागवान संजीव चौहान ने एक हेक्टेयर में 52 मीट्रिक टन सेब पैदा कर दिखाया है।
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2013 में मिल चुका है राष्ट्रीय पुरस्कार

हालांकि, इस साल प्रदेश में सेब की पैदावार पिछले साल के मुकाबले कम है। संजीव को वर्ष 2013 में बंगलूरू में उत्कृष्ट बागवानी के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है। उन्होंने अपने बगीचे में 41 विदेशी किस्मों के पौधे लगाए हैं। इनमें 25 किस्मों के पौधे फल दे रहे हैं।

उनके बगीचे में सेब की सुपर चीफ, स्कारलेट स्पर, गेल गाला, ग्रेनी स्मिथ, आर्गेन स्पर, वाशिंगटन रेड डिलिशियस, ऐस और जोना गोल्ड जैसी अमेरिकी किस्में हैं। इसके अलावा रेड यूजी, कोरेड यूजी जैसी चीन की सेब किस्मों सहित इटली की रेड विलॉक्स, जेरोमाइन, रेडलम गाला, बुकाई गाला, एजटेक यूजी किस्में भी मौजूद हैं।
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छह साल की मेहनत का नतीजा

कोटखाई के बागवान संजीव चौहान ने बताया कि यह सब रातों रात नहीं हुआ है। विदेशी एजेंसियों के साथ संपर्क कर मिट्टी और आबोहवा का गहन अध्ययन किया गया। इसके बाद किस्में चुनी गईं। छह साल की मेहनत के बाद रिकॉर्ड तोड़ पैदावार हासिल करने में सफलता मिली है।

आधुनिक तकनीक अपनाने के साथ-साथ और मिट्टी की न्यूट्रीशियन वैल्यू को भी बरकरार रखा। अच्छी पैदावार के लिए प्रूनिंग, पौधों की देखभाल, मौसम का साथ देना बहुत जरूरी है। कोटखाई के उद्यान विकास अधिकारी डा. जगदीश ने बताया किहमने बगीचे का दौरा किया। संजीव चौहान के बगीचे में प्रति हेक्टेयर 52 मीट्रिक टन सेब की पैदावार पाई गई।

यदि बागवान प्रूनिंग और तय मानकों के अनुसार सेब की देखभाल करते हैं, पौधों को न्यूट्रीशियन देते हैं तो प्रदेश में स्पर की तरह रायल डिलिशियस की पैदावार भी बढ़ सकती है। कोटखाई के इस बागवान ने यही किया है।
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