पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की पहली सरकार के दौरान भी एक गुमनाम पत्र में उनकी सरकार के मंत्री प्रवीण शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। तब सोशल मीडिया नहीं था, इसलिए जनता के बीच तो उतनी किरकिरी नहीं हुई, लेकिन संगठन के भीतर के और बाहर के विरोधियों ने इसे तूल देना शुरू कर दिया। उस दौरान प्रवीण शर्मा ने इस्तीफा तक देने का प्रस्ताव कर दिया, लेकिन तब धूमल और संगठन ने ऐसा करने से उन्हें रोक दिया था। पत्र को ही नजरंदाज कर दिया था।
उपचुनाव पर फोकस करने के निर्देश
उपचुनाव से ठीक पहले कांगड़ा में भाजपा के भीतर गुटबाजी अपने चरम पर पहुंचने लगी है। सोशल मीडिया में भी फजीहत हो रही है। ऐसे में इसका असर उपचुनाव पर पड़ने से पहले ही भाजपा डैमेज कंट्रोल में जुट गई है। प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सत्ती खुद धर्मशाला पहुंचे हैं।
अगले कुछ दिन तक पूरा संगठन धर्मशाला में डेरा जमाकर चुनावी तैयारियों में जुटेगा। कार्यकर्ताओं को प्रचार-प्रसार का जिम्मा सौंपा जा रहा है। साथ ही हर बूथ स्तर पर प्रबुद्घ लोगों से संपर्क करने का खाका तैयार कर लिया गया है।