भाजपा के प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना
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हिमाचल प्रदेश भाजपा के प्रभारी अविनाश राय खन्ना ने कहा कि सोनिया गांधी का पुत्र मोह कांग्रेस को बर्बादी के मुहाने पर ले आया है। इसी ढर्रे पर अब हिमाचल प्रदेश में प्रतिभा सिंह भी चल रही हैं। दिल्ली में कांग्रेस की रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह बोलती हैं कि ‘हम हिमाचल प्रदेश को राहुल गांधी जी की झोली में डाल देंगे’। इनके नेता हिमाचल को अपनी जागीर समझते हैं, तभी तो प्रतिभा सिंह ऐसा कह रही हैं। खन्ना ने कहा कि राजनीति में आम आदमी पार्टी नई आई है। हिमाचल के कांग्रेसी नेताओं की दिल्ली दरबार में विशेष रूप से एक परिवार के महिमामंडन और चरणवंदना की आदत हो गई है। शिमला में पत्रकार वार्ता में मंगलवार को अविनाश राय खन्ना ने कहा कि उनकी सलाह है कि इन दोनों पार्टी के नेताओं को पिछले पौने पांच साल के दौरान हिमाचल प्रदेश में हुआ विकास नहीं दिखता तो वे केंद्र की आयुष्मान भारत या हिमाचल की हिमकेयर योजना के तहत अपना मुफ्त इलाज करवाएं।
चापलूसी करना कांग्रेस की आदत है और हाईकमान को खुश करने के लिए न तो उन्होंने देवभूमि का सम्मान किया और न ही यहां के लोगों की भावनाओं की कद्र की है। दिल्ली की जनता को झूठ बोलकर सत्ता में आई आम आदमी पार्टी खुद नए-नए तरीके के भ्रष्टाचार कर रही है। स्टिंग का ज्ञान देने वाला आज खुद स्टिंग के घेरे में है। इसका जवाब केजरीवाल को देना चाहिए कि इससे कितनी काली कमाई की। दिल्ली में नई शराब नीति को लागू करके केजरीवाल और सिसोदिया ने अपनी तिजोरी ही भरी है। आम आदमी पार्टी को अपना भ्रष्टाचार ही नहीं दिख रहा तो ये दोनों पार्टियां हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की ओर से किए विकास को कहां से देखेंगे। इस मौके पर कांगड़ा सहकारी बैंक के अध्यक्ष राजीव भारद्वाज, मीडिया सह प्रभारी करण नंदा और अन्य नेता भी मौजूद रहे।
जल्दबाजी में प्रत्याशी घोषित नहीं करेगी भाजपा
हिमाचल प्रदेश भाजपा ने साफ कर दिया है कि पार्टी राज्य में प्रत्याशी घोषित करने में जल्दबाजी नहीं करेगी। भाजपा के वरिष्ठ नेता मंडल पदाधिकारियों के बीच जाकर कार्यकर्ताओं की नब्ज टटोलेंगे। मंगलवार को इस संबंध में किए गए प्रश्न का उत्तर देते हुए भाजपा के प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना ने कहा कि भाजपा के उम्मीदवार साफ हैं। जिसके हाथ में कमल का फूल होगा, वही प्रत्याशी बनाया जाएगा। भाजपा की टिकट देने की अपनी प्रणाली है। इस संबंध में संसदीय बोर्ड ही फैसला लेता है।