इसके अलावा इस झील तक पर्यटक कैसे पहुंचें, न तो इसका फोरलेन से कोई रास्ता दिखता है और न फोरलेन पर कहीं ऐसे साइन बोर्ड लगे हैं, जिससे यहां पहुंचने से पहले ही पर्यटकों को पता चले कि आगे ऐसी सुंदर झील भी है। इन सभी समस्याओं के समाधान के लिए 1,500 करोड़ रुपये की एक परियोजना झील की कायाकल्प के लिए पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2022 में शुरू हुई।
वर्ष 2023 में हिमाचल प्रदेश की सत्ता बदलते ही यह परियोजना ठप होने से धरातल पर नहीं उतर पाई। इस परियोजना में मंडी भराड़ी क्षेत्र में गोबिंदसागर झील पर पुल से नीचे की तरफ एक चेकडैम बनना था, जिससे 12 महीने झील पानी रुकता और पर्यटक जब चाहें तब बोट, जैटी, शिकारा आदि का आनंद ले पाते। इसके अलावा नाले के नौण में झील के बीच समाए कहलूर रियासत के छठी से 17वीं सदी के शिखर शैली को दर्शाते रंगनाथ, खनेश्वर और नारदेश्वर मंदिरों को लिफ्ट करना था।
परियोजना में 1400 करोड़ केंद्र और 100 करोड़ रुपये हिमाचल प्रदेश सरकार को खर्च करने थे। यह काम तीन चरणों में होना था। मंदिरों को लिफ्ट करने का काम पहले चरण में 105 करोड़ से होना था। दूसरे चरण में चार नाव घाट, वॉकवे, संपर्क सड़कें, पार्किंग, पानी, बिजली और अपशिष्ट प्रबंधन की योजना थी। तीसरे चरण में चेकडैम बनाना था। चेकडैम बनने से पूरा साल झील में वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां चलनी थीं, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलना था।
अभी साल में मात्र दो से तीन महीने ही झील में वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां होती हैं या बड़ी कम संख्या में पर्यटक झील में बोट या शिकारा आदि का आनंद ले पाते हैं। सालभर स्पोर्ट्स गतिविधियां होतीं और पर्यटक पहुंचते तो स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता। परियोजना चार साल बीतने के बाद भी केंद्र और राज्य सरकार की उदासीनता के चलते धरातल पर नहीं उतर पाई।
गोबिंदसागर एडवेंचर एंड वाटर स्पोर्ट्स एसोसिएशन की संस्थापक एवं कोषाध्यक्ष निर्मला राजपूत ने बताया कि स्थानीय लोगों को इस प्रोजेक्ट से बड़ी उम्मीद थी, लेकिन इस पर काम ही शुरू नहीं हुआ। गर्मियों में यहां पानी ही नहीं रहता है तो वाटर स्पोर्ट्स या एडवेंचर गतिविधियां कैसे हो सकती हैं। पानी साल भर झील में रहे, तभी फोरलेन पर साइन बोर्ड लगाने का फायदा है।
गोबिंदसागर एडवेंचर एंड वाटर स्पोर्ट्स ट्रेनिंग सेंटर के चेयरमैन जितेंद्र चंदेल ने कहा कि यह परियोजना नवंबर 2022 तक चर्चा में रही। उसके बाद सरकार बदलते ही परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई। हिमाचल वाटर स्पोर्ट्स के प्रदेश महासचिव इशान अख्तर ने बताया कि भाखड़ा डैम से कंदरौर तक करीब 65 किलोमीटर लंबी झील में गर्मियों में पानी नहीं रहता तो वाटर स्पोर्ट्स की ट्रेनिंग किसे दें। मात्र तीन महीने झील में पानी रहता है।
परियोजना में तीन मॉड्यूल के तहत काम होना था। मंडी भराड़ी में गोबिंदसागर झील के ऊपर बने पुल के नीचे की तरह चेकडैम बनना था। साल 2022 में यहां से मिट्टी के सैंपल लिए और ब्लूप्रिंट तैयार किया गया। डीपीआर भी बनाई गई, पर इसके बाद काम क्यों बंद हुआ, इसकी जानकारी नहीं है। - पवन कुमार शर्मा, निदेशक, हिमाचल प्रदेश रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड