विभाग की ओर से 256 सीटें 13 अस्पतालों और पपरोला कॉलेज में दी है। इसमें 11 आयुष अस्पतालों में 16-16, जिला आयुष अस्पताल चंबा में 20, क्षेत्रीय आयुष अस्पताल शिमला में 24 और पपरोला कॉलेज में 36 सीटें निर्धारित की गई है। इससे युवा आसानी से अपने ही जिले में कोर्स कर सकेंगे। कोर्स की अवधि एक वर्ष निर्धारित की गई है। विभाग के अनुसार जिला आयुष अस्पताल बिलासपुर, हमीरपुर, धर्मशाला (कांगड़ा), कुल्लू, मंडी, नाहन, सोलन और ऊना में कोर्स की सुविधा दी गई है। इसी के साथ आयुष अस्पताल देहरा (कांगड़ा), शिमला और नालागढ़ (सोलन) के साथ आरजीजीपीजी आयुष कॉलेज एवं अस्पताल पपरोला (कांगड़ा) में भी युवा कोर्स कर सकते हैं।
नस्य प्रोसेस से माइग्रेन, सिरदर्द, साइनसाइटिस, पुरानी सर्दी और श्वसन से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलती है। वमन विधि में कफ से जुड़ी दिक्कतों जैसे अस्थमा, ऐसिड रिफ्लक्स और एलर्जी में मदद करती है। इसमें शरीर से एक्स्ट्रा बलगम और गंदगी निकालने के लिए औषधीय जड़ी-बूटियों की मदद से उल्टी कराई जाती है। शिरोधारा विधि स्ट्रेस, चिंता, नींद की समस्या और माइग्रेन के लिए फायदेमंद है। इन सभी के बारे में जानकारी दी जाएगी।
प्रदेश के 13 आयुष अस्पतालों और पपरोला कॉलेज में स्पा थेरेपी (पंचकर्म) कोर्स शुरू किया जा रहा है। इससे पंचकर्म सीखने में युवाओं को मदद मिलेगी। ये कोर्स एक वर्ष का रहेगा। इसके लिए अस्पतालों और कॉलेजों में सीटें निर्धारित कर दी है। -रोहित जमवाल, निदेशक, आयुष विभाग शिमला।