तपोवन में शीतकालीन सत्र के दौरान सियासी रंग भी बदले। पहले दिन जयराम-मुकेश में गलबहियां, नरम तेवर तीसरे दिन वाकआउट के साथ तल्ख हुए। विपक्ष ने सोची-समझी रणनीति के तहत अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए जयराम सरकार को किनारे पर धकेलने की कोशिश की।
हालांकि मुख्यमंत्री जयराम ने सदन में अपने अनुभव को ढाल बनाकर विपक्ष को करारा जवाब भी जरूर दिया। वहीं, सत्र से पहले मुख्यमंत्री की ओर से उनको गुलदस्ते न देने का आग्रह जनता के साथ मंत्रियों ने भी नहीं माना। चरणवंदना भी सत्र में नहीं रुकी।
करोड़ों खर्चे पर जनता को बैठने के लिए एक कुर्सी नहीं
जिस जनता ने सरकार को चुना, उसी जनता को विधानसभा परिसर में बैठने के लिए कोई कुर्सी तक नहीं लगाई गई। जनता अपने चुने गए नुमाइंदों से मिलने के लिए घंटों लाइन में लगी रही।
सत्र में कर्मचारी और अफसर सीएम के स्वागत में ड्यूटी देते देखे। चार दिन में शीतकालीन सत्र पर करीब 4 करोड़ रुपये खर्च हो गए। फिजूलखर्ची कर शहर को रंग-बिरंगी लड़ियों से भी सजाया गया था।