हिमाचल विधानसभा का शीतकालीन सत्र सोमवार दोपहर बाद दो बजे से धर्मशाला के तपोवन में शुरू होगा। सत्र के हंगामेदार रहने के आसार हैं। सत्र के दौरान नोटबंदी, भ्रष्टाचार, सुरक्षा व्यवस्था, अवैध भवन और खनन जैसे कई मुद्दे उठेंगे। 23 दिसंबर तक चलने वाले सत्र में पांच बैठकें होंगी और साढ़े तीन सौ सवाल गूंजेंगे।
बारहवीं विधानसभा के तेरहवें सत्र में हिस्सा लेने के लिए रविवार को सत्तापक्ष और विपक्ष के विधायक धर्मशाला पहुंच गए। अगले साल दिसंबर में सरकार का कार्यकाल पूरा होने के कारण प्रदेश की 12वीं विधानसभा का यह अंतिम शीत सत्र होगा। सोमवार को सत्र की शुरुआत पूर्व शिक्षा मंत्री व भोरंज से पूर्व भाजपा विधायक आईडी धीमान के देहांत पर शोकोद्गार प्रस्ताव से होगी।
विस अध्यक्ष ने बुलाई सर्वदलीय बैठक
शिमला। धर्मशाला शीत सत्र सही ढंग से चले इसको लेकर विधानसभा अध्यक्ष बृज बिहारी लाल बुटेल ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है। यह बैठक डेढ़ बजे होंगे। बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष से सदन से सही तरीके से चलने की अपील की जाएगी।
हंगामे पर सख्त कदम उठाना पड़ा तो जरूर उठाऊंगा
विधानसभा अध्यक्ष बीबीएल बुटेल ने कहा कि सदन शांति और सौहार्दपूर्ण वातावरण में चले, इसकी कोशिश करेंगे। सभी विधायकों को प्रश्न पूछने का समय देने का प्रयास करेंगे। उम्मीद है कि शीतकालीन सत्र में भी बेहतर कार्य होगा।
लोकसभा की तरह हिमाचल सदन हंगामे की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए। बेवजह हंगामे पर सख्त कदम उठाना पड़ा तो जरूर उठाऊंगा। हिमाचल विधानसभा सदन की पहचान पूरे भारतवर्ष में शांतिप्रिय सदन और अच्छे कार्य के लिए है।
पिछले वर्ष शीतकालीन सत्र से पहले विधानसभा परिसर तपोवन को सफेद हाथी करार दे चुके विस अध्यक्ष बीबीएल बुटेल की पीड़ा रविवार को तपोवन में प्रेस वार्ता में फिर से झलक आई। कहा कि तपोवन में जब विधानसभा परिसर बना था, उस दौरान सोच रहा था इस भवन की जरूरत नहीं है। इसके रखरखाव पर धन खर्च करना फिजूलखर्ची है।
नोटबंदी की तरह होगी कागजबंदी
भवन बन गया है तो यह अब सरकार की संपत्ति है। इसका पूर्ण प्रयोग करना जरूरी है। इसलिए पिछले वर्ष तपोवन परिसर में राष्ट्रीय ई-विधान अकादमी स्थापित करने का प्रस्ताव बनाया था।
इसकी डीपीआर भी बन चुकी है, लेकिन केंद्र ने इस पर तेजी नहीं दिखाई है। कहा कि शीत सत्र के बाद खुद दिल्ली जाकर यह मामला उठाएंगे। विधानसभा सत्र की समयसीमा बढ़ाने पर बुटेल बोले - सरकार चाहे तो यहां तीन से चार सत्र भी हो सकते हैं।
बुटेल ने कहा कि शीतकालीन सत्र पूरी तरह पेपर लेस होगा। विधायकों को सूचनाएं और अन्य जानकारियां कंप्यूटर के माध्यम से दी जाएंगी। विधायकों को एक भी कागज नहीं दिया जाएगा। सब काम कंप्यूटर पर होगा। नोटबंदी की तरह शीत सत्र में कागजबंदी होगी।