विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन मंगलवार को विधानसभा परिसर के बाहर राजनीतिक तापमान चढ़ गया। भाजपा और कांग्रेस विधायक अलग-अलग मुद्दों को लेकर तख्तियां हाथों में लेकर आमने-सामने आए और जमकर नारेबाजी की। भाजपा ने हिमकेयर योजना में मरीजों को उपचार नहीं मिलने का आरोप लगाकर प्रदेश सरकार को घेरा, तो कांग्रेस विधायकों ने चीनी के बढ़ते दाम और महंगाई को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन मंगलवार को विधानसभा परिसर के बाहर राजनीतिक तापमान चढ़ गया। भाजपा और कांग्रेस विधायक अलग-अलग मुद्दों को लेकर तख्तियां हाथों में लेकर आमने-सामने आए और जमकर नारेबाजी की। भाजपा ने हिमकेयर योजना में मरीजों को उपचार नहीं मिलने का आरोप लगाकर प्रदेश सरकार को घेरा, तो कांग्रेस विधायकों ने चीनी के बढ़ते दाम और महंगाई को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला।
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विधानसभा परिसर में कुछ देर तक दोनों दल प्रदर्शन करते रहे। भाजपा विधायक जहां सरकार से हिमकेयर योजना की स्थिति स्पष्ट करने की मांग करते नजर आए, वहीं कांग्रेस विधायक महंगाई के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते रहे। भाजपा विधायक हाथों में ऐसी तख्तियां लेकर पहुंचे, जिन पर हिमकेयर योजना के तहत इलाज में आ रही दिक्कतों को लेकर सवाल उठाए गए थे। भाजपा ने आरोप लगाया कि सरकार हिमकेयर योजना को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर जरूरतमंद मरीजों को अस्पतालों में उपचार की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
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नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमकेयर का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करवाना है। ऐसे में यदि पात्र मरीजों को इलाज के लिए अस्पतालों में परेशानी उठानी पड़ रही है तो सरकार को इसकी वजह स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने योजना में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को तत्काल दूर करने की मांग की।
दूसरी ओर, कांग्रेस विधायक भी हाथों में तख्तियां लेकर विधानसभा परिसर में पहुंचे। कांग्रेस ने चीनी के बढ़ते दाम को महंगाई से जोड़ते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस विधायकों का कहना था कि आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर आम लोगों की रसोई और घरेलू बजट पर पड़ रहा है। कांग्रेस विधायकों ने महंगाई को लेकर नारेबाजी की और केंद्र की नीतियों पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि आम जनता पहले ही बढ़ती कीमतों के कारण आर्थिक दबाव में है और जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ने से उसकी मुश्किलें और बढ़ रही हैं।