भाजपा के मुख्यमंत्री चेहरे प्रेम कुमार धूमल की हार के बाद ठंडा पड़ा पार्टी में माहौल अब गर्माने लगा है। जश्न को बाराती तैयार हो चुके हैं, बस दूल्हे का इंतजार है। दिल्ली से आलाकमान के दो दूतों की पिटारी से निकलने वाले नाम से बारातियों की पगड़ी का रंग तय होगा।
सेहरा सजने के बाद कुछ खुश होकर नाचेंगे तो कुछ के लिए नाचना मजबूरी हो सकती है। जयराम और नड्डा के समर्थकों ने अभी से राजधानी में डेरा जमा दिया है। एक होटल को बेस कैंप बनाकर जश्न की भी तैयारी चल रही है, जबकि धूमल खेमा शिमला से दूर समीरपुर से यह नजारा देख रहा है।
चुनाव में 44 विधायकों की जीत के बाद भी भाजपा में एक अजब शांत माहौल है। विधानसभा हल्कों से जीत कर शिमला जुट रहे विधायक और उनके समर्थक खुलकर खुशी का इजहार नहीं कर रहे। प्रदेश कार्यालय में बधाई देने के लिए आने वालों को लड्डू भी चुपचाप खाना पड़ रहा है।
इसकी चर्चा करना एक तरह से प्रतिबंधित
खुशी की सभा में मायूसी का माहौल यदा कदा आने वाले जीते विधायक से चहक उठता है, लेकिन जैसे ही मुख्यमंत्री के नाम पर फिर सब ‘जैसे थे‘ कि स्थिति में आ जाते हैं। मुख्यमंत्री कौन होगा इसकी चर्चा करना एक तरह से प्रतिबंधित है।
इस सवाल का एक ही जवाब सब भाजपाईयों की जुबान पर है कि यह तो दिल्ली वाले तय करेंगे। प्रदेश कार्यालय से बाहर भी कुछ ऐसा ही माहौल है। खुले में कौन क्या बात कर रहा है उसको लेकर हर किसी के कान खड़े हो जाते हैं। भले खुले में ऐसा माहौल दिख रहा है, लेकिन अंदरखाने अपने खेमे से सीएम बनने का इंतजार कार्यकर्ताओं पर भारी पड़ने लगा है।
पीटरहॉफ भी बना है केंद्र
प्रदेश कार्यालय के साथ पीटरहॉफ भी भाजपा के मुख्यमंत्री चेहरे की सियासत का केंद्र बना हुआ है। मुख्यमंत्री पद के दावेदार जयराम ठाकुर यहीं हैं। शिमला पहुंचने वाले अधिकतर विधायक भी सबसे पहले यहीं पहुंच रहे हैं। यहां माहौल प्रदेश कार्यालय के मुकाबले कुछ जोशीला है।
विधायकों के चेहरे भी खिले हुए दिख रहे हैं। मुख्यमंत्री के चहेरे को लेकर यहां भी सवाल किसी को ज्यादा पसंद नहीं है। दबी जुबान में कार्यकर्ता नड्डा और जयराम का नाम लेते हैं, लेकिन इन दोनों का नाम अलग अलग लेने के बजाए एकसाथ लिया जा रहा है।
दूल्हे का तंज पड़ा भारी
चुनाव से ऐन पहले मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित हुए वीरभद्र सिंह ने भाजपा को बिना दूल्हे की बारात बताया था। उस समय भाजपा ने अपना मुख्यमंत्री प्रत्याशी तय नहीं किया था। इसके बाद वीरभद्र और कांग्रेस लगातार भाजपा को दूल्हे के नाम को लेकर कटाक्ष करती रही।
30 अक्टूबर को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने धूमल के नाम कर एलान किया। शाह ने कांग्रेस पर पलटवार के लिए कहा कि कांग्रेस बोलती रही कि हम बिना दूल्हे के हैं। हमने अपना दूल्हा घोषित कर दिया। 18 दिसंबर को आए परिणाम में भाजपा जीती लेकिन दूल्हा धूमल हार गया।