हिमाचल प्रदेश में सरकारें बनाने के लिए एक समीकरण अहम रहा है। बीते दो विधानसभा चुनावों में इसी समीकरण के चलते विजयी दल जीत में बड़ा अंतर नहीं ला सके थे।
हिमाचल में बीते दो विधानसभा चुनावों में सरकारें चार फीसदी मतों के अंतर से बनती रही हैं। विधानसभा चुनावों में विजयी दल अपनी जीत में बड़ा अंतर नहीं ला सके हैं। साल 2003 से लेकर 2012 तक के चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवार 14 से 16 फीसदी तक वोट प्राप्त करते आए हैं।
निर्दलियों के यही वोट बड़े दलों के नेताओं की जीत-हार को तय करते हैं। जिस सीट पर निर्दलीय खड़े होते हैं, बीते तीन चुनावों से समीकरण बदलते रहे हैं। साल 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशियों को कुल 43.21 फीसदी मत पड़े।
भाजपा को 38.83, निर्दलियों को 15.87 और हिमाचल लोकहित पार्टी को 4.52 मत हासिल हुए। 2012 में कांग्रेस ने भाजपा से 4.38 मत अधिक प्राप्त कर प्रदेश में सरकार बनाई।
साल 2007 के चुनाव में भाजपा को 43.78 फीसदी, कांग्रेस को 39.54 फीसदी और निर्दलियों को 14.34 मत प्राप्त हुए। भाजपा की जीत का अंतर 4.24 फीसदी मत रहे।
2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 41 फीसदी वोट मिले। भाजपा को 35.38 फीसदी और निर्दलियों को 16.27 फीसदी मत पड़े। कांग्रेस ने 2003 में 5.62 फीसदी मत अधिक प्राप्त कर प्रदेश में सरकार बनाई।
निर्दलीय बिगाड़ सकते हैं चुनावी समीकरण
हिमाचल विधानसभा चुनाव में इस बार भी निर्दलीय चुनावी समीकरण बिगाड़ सकते हैं। वर्ष 2012 विधानसभा चुनाव पर नजर दौड़ाएं तो जिला कांगड़ा, मंडी और सोलन में निर्दलीय ने भाजपा और कांग्रेस उम्मीदवारों के पसीने छुड़ा दिए थे।
हालांकि, कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टियों ने निर्दलीय उम्मीदवारों को बैठाने का पुरजोर लगाया था, लेकिन ये उम्मीदवार मैदान में डटे रहे। तीन जिलों की 15 विधानसभा क्षेत्रों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने 3 से लेकर 10 हजार वोट लेकर दोनों पार्टियों ने नेताओं को हौसले बुलंद कर दिए थे।
जिला कांगड़ा के 11 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां 9 और इससे अधिक लोगों ने निर्दलीय चुनाव लड़ा था। निर्दलीय उम्मीदवारों में सर्वाधिक वोट लेने वालों में इंदौरा विधानसभा क्षेत्र के मलेंद्र राजन ने 3944, फतेहपुर से सुधार सुशांत ने 9335, ज्वाली से संजय कुमार गुलेरिया ने 10924, देहरा से योगराज ने 9170, जसवां परागपुर से नवीन धीमान ने 6982 (लोकहित
पार्टी), जयसिंहपुर से रविंद्र धीमान ने 8006, नगरोटा बगवां से अरुण कुमार ने 20883, कांगड़ा से पवन काजल ने 14632, पालमपुर से दूलोराम (लोकहित पार्टी) ने 6115, बैजनाथ से उधोराम 7049 ने भाजपा और कांग्रेस पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी थीं।
इसी तरह मंडी जिले के सदर विधानसभा क्षेत्र में श्याम लाल ने 3370 वोट और बल्ह से महंतराम ने 9023 हासिल किए थे। सोलन जिले के अर्की विधानसभा क्षेत्र में भी अमर चंद पाल ने 10477 वोट हासिल कर भाजपा और कांग्रेस उम्मीदवार के पसीने छुड़ा दिए थे। इस बार भी निर्दलीय उम्मीदवार पार्टी नेताओं की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं।