भाजपा और कांग्रेस में डैमेज कंट्रोल का खेल दिग्गजों की साख से जुड़ गया है। अगर बागी नहीं मानते हैं तो उसका खामियाजा उनके सियासी आकाओं को झेलना पड़ सकता है। शांता और धूमल सरीखे नेता भी डैमेज कंट्रोल के दबाव में हैं। भाजपा के 13 बागियों में से पालमपुर में प्रवीण शर्मा ही बड़ी चुनौती हैं।
सूत्रों के मुताबिक रामलाल तक से मिलने को प्रवीण तैयार नहीं है। चंबा में सिटिंग विधायक बीके चौहान से भी लगातार वार्ता हो रही है। उधर, कांग्रेस ने बागियों को मनाने का जिम्मा बाहरियों को दिया है, लेकिन अभी तक मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का जादू ही काम आया है। हालांकि पार्टी अभी भी शिमला और रामपुर में बगावत को शांत नहीं कर पाई है।
प्रत्याशी चयन के बाद से दोनों ही दलों में टिकट नहीं मिलने से असंतुष्टों की बड़ी फौज बगावत पर उतर आई। नामांकन के अंतिम दिन तक दोनों ओर के 26 बागी मैदान में शेष रहे। बीते 48 घंटों में दोनों दलों के सियासी रणनीतिकारों ने बगावत को थामने के लिए हर दांव चला है।
भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन रामलाल ने प्रदेश चुनाव प्रभारी थावर चंद गहलोत और प्रदेश प्रभारी मंगल पांडेय को मिशन डैमेज कंट्रोल पर लगाया। रूठों को मनाने की असल परीक्षा पालमपुर, चंबा, फतेहपुर, कसुम्पटी और श्री रेणुका जी विधानसभा में है। सूत्रों की माने तो बुधवार तक पालमपुर, चंबा को छोड़ शेष 11 बागियों को मना लिया गया है।
भाजपा का बागी प्रवीण पर अटका पेच
पालमपुर में भाजपा के लिए इंदु गोस्वामी को बगावत से बचाने में पार्टी के पसीने छूट गए हैं। भाजपा बागी प्रवीण शर्मा मानने को तैयार नहीं है। सूत्रों की माने तो आखिरी दिन राष्ट्रीय महामंत्री रामलाल ने पालमपुर की बगावत का मामला अपने हाथ में ले लिया है।
प्रवीण के लिए उनके पास अच्छा ऑफर भी बताया जा रहा है, लेकिन प्रवीण उनसे मिलने को तैयार नहीं है। बुधवार को रामलाल ने शांता कुमार को प्रवीण से मुलाकात करवाने को कहा, लेकिन प्रवीण ने मिलने से इंकार कर दिया।
प्रवीण इंदु गोस्वामी के लिए किसी भी कीमत पर मानने को तैयार नहीं हैं, जबकि इंदु को सुरक्षित करने के लिए पार्टी दिग्गजों ने हर दांव चल दिया है।
शिमला और रामपुर कांग्रेस की चुनौती
बागियों को साधने में कांग्रेस की रणनीति में एक बार फिर धुरी वीरभद्र सिंह ही हैं। दो पूर्व मुख्यमंत्रियों हरीश रावत और भूपेंद्र हुड्डा को डैमेज कंट्रोल का जिम्मा दिया। दोनों अनुभवी नेता बागियों से संपर्क साध रहे हैं।
माल रोड पर एक निजी होटल में बागियों से मुलाकात के बाद अंतिम फैसला हॉली लॉज में हो रहा है। पार्टी के लिए नालागढ़, शिमला शहर, भोरंज, द्रंग, मनाली और रामपुर में निर्दलीय उतरे बागियों चुनौती बने हुए हैं।
नालागढ़, भोरंज और मनाली में डैमेज कंट्रोल कामयाब रहा है, लेकिन शिमला में हरीश जनारथा और रामपुर में सिंघी राम बड़ी चुनौती है। दोनों ही नेताओं से कोई दौर की वार्ता हो चुकी है। जनारथा ने बैकफुट पर आने से इनकार कर दिया है, जबकि सिंघी राम भी अड़े हुए हैं।
धामी, कौशल और बावा को मनाने में कांग्रेस कामयाब
हरदीप बावा
- फोटो : File Photo
कांग्रेस टिकट न मिलने से बागी होकर चुनाव मैदान में उतरे नेताओं को मनाने का सिलसिला जारी है। 13 में से 3 बागी नेताओं धर्मवीर धामी, प्रेम कौशल और हरदीप बावा को मनाने में कांग्रेस कामयाब हो गई है। तीनों निर्दलीय उम्मीदवार 26 अक्तूबर को अपना नामांकन वापस लेकर कांग्रेस प्रत्याशियों के लिए मैदान छोड़ेंगे और उनके पक्ष में काम भी करेंगे।
मनाली विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार धर्मवीर धामी ने चुनाव मैदान छोड़ने की बात स्वीकारी है। दो दिन पहले उनकी पार्टी में वापसी हुई है। मंगलवार तक वह मैदान छोड़ने की स्थिति स्पष्ट नहीं कर रहे थे। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी प्रेसवार्ता में धामी के नामांकन वापस लेने की बात कही।
भोरंज विधानसभा क्षेत्र के निर्दलीय उम्मीदवार प्रेम कौशल भी मैदान छोड़ने को तैयार हो गए हैं। नालागढ़ विधानसभा क्षेत्र के हरदीप बावा भी नामांकन वापस ले रहे हैं। कांग्रेस पार्टी के महासचिव नरेश चौहान ने इसकी पुष्टि की है।
चौहान ने कहा कि टिकट न मिलने से पार्टी के नेता असंतुष्ट हो गए थे। इसके चलते उन्होंने निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने का फैसला लिया। बातचीत के बाद अधिकांश बागी नेता मान गए हैं जबकि वीरवार तक शेष नाराज नेताओं को मना लिया जाएगा।