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इस बार कांग्रेस और भाजपा को मैदान में ‘अपनों’ से ही जूझना होगा

Tue, 24 Oct 2017 01:46 PM IST
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, शिमला
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विधानसभा चुनाव में टिकट कटने से बागी हुए नेताओं ने भाजपा और कांग्रेस लीडरशिप के पसीने छुड़ा दिए हैं। नामांकन करने के आखिरी दिन बागियों की तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। दोनों दलों में 12-12 बागियों ने बतौर निर्दलीय चुनावी ताल ठोकी है। बगावत की जद में आए विधानसभा हलकों में पार्टी प्रत्याशियों को विरोधी को पटकनी देने से पहले अपनों से जूझने की चुनौती रहेगी।
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जिताऊ फार्मूले में फिट नहीं बैठने वालों को बाहर करने से भाजपा में असंतुष्टों का बड़ा कुनबा पैदा हो गया है। उधर, कांग्रेस में बगावत के सुर ज्यादा तेज हैं। यहां वीरभद्र और सुक्खू खेमे में चली खींचतान को बगावत से जोड़ कर देखा जा रहा है। हालांकि भाजपा के सक्रिय डैमेज कंट्रोल तंत्र ने आठ विधानसभा क्षेत्रों में रोष थाम लिया है, लेकिन कांग्रेस में रूठों को मनाने पर कसरत होना बाकी है।

अब नामांकन वापसी की अंतिम तिथि 26 अक्तूबर से पहले दोनों दलों के सामने बागियों को साधने की चुनौती है। भाजपा की प्रत्याशी सूची में चार सिटिंग विधायकों समेत एक दर्जन पूर्व मंत्रियों और विधायक को बाहर करने से बगावत की चिंगारी भड़की। पूर्व मुख्यमंत्रियों धूमल और शांता के जिलों हमीरपुर और कांगड़ा में बागियों ने हल्ला बोल दिया।
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पार्टी ने तुरंत प्रदेश चुनाव प्रभारी थावर चंद गहलोत और प्रभारी मंगल पांडेय के अधीन डैमेज कंट्रोल तंत्र सक्रिय कर दिया। आधा दर्जन हलकों नूरपुर, भोरंज, सोलन, झंडूता, शिमला शहरी, भरमौर दून, सुंदरनगर, शिमला ग्रामीण में असंतुष्टों को मना लिया गया, लेकिन एक दर्जन को मनाने की चुनौती बरकरार है।

पार्टी की बड़ी चिंता चंबा में सिटिंग विधायक बीके चौहान, पालमपुर में पूर्व विधायक प्रवीण शर्मा और श्री रेणुका में हृदय राम को मनाने की है। कुल 6 हलके बगावत से प्रभावित हैं, जिसमें 9 अन्य बागी मैदान में हैं। उधर, कांग्रेस में बगावत को नियंत्रित करने के लिए ग्राउंड पर कोई कसरत नहीं दिखी।

आशंका जताई जा रही है कि आगे भी वीरभद्र और सुक्खू खेमे की सियासत डैमेज कंट्रोल को प्रभावित करेगी। पार्टी दस सीटों पर बगावत झेल रही है, जिसमें रामपुर में सिंघी राम, शिमला शहर में जनारथा, नालागढ़ में हरदीप सिंह बावा, भोरंज में प्रेम कौशल, द्रंग में पूर्ण चंद डोगरा को मनाना सबसे चुनौती भरा है। 

भाजपा में चलेगा निष्कासन का डंडा 
भाजपा का थिंक टैंक पार्टी में टिकट कटने से उठी बगावत पर अब नए सिरे से रणनीति तय करने में जुट गया है। दिल्ली से आकर शिमला में कैंप कर रहे सीनियर लीडरों ने बगावत से होने वाले नुकसान को कम करने में जुट गया है। पार्टी अगले दो दिन बागियों को मनाने के लिए हर दांव खेलेगी।

बगावत से लगे सियासी डेंट पर अब संगठन धूमल, शांता, नड्डा के अलावा जिले के नेताओं को झोंकेगा। कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने के लिए बागियों से दूरी बनाने का मंत्र फूंका जा रहा है। जो असंतुष्ट भारी मन के साथ अभी भी पार्टी में हैं उनको इलेक्शन के बाद बड़ी जिम्मेदारी देने की डोज पिलाई जा रही है। निर्दलियों के बाद अब पार्टी के सामने अगला खतरा कुछ सीटों पर भितरघात का है। बागियों के खिलाफ 26 अक्तूबर के बाद निष्कासन का डंडा चलेगा।

कांग्रेस की चिंता खेमों को एक करने की 
पार्टी से बगावत कर निर्दलीय उतरे कांग्रेस नेताओं को मनाना पार्टी के लिए आसान नहीं है। भाजपा के मुकाबले कांग्रेस ने डैमेज कंट्रोल पर धीमी शुरुआत की है। हाईकमान को बागियों को मनाने के लिए वीरभद्र और सुक्खू खेमे को एक करने की चुनौती है। शिमला, नालागढ़, लाहौल, आदि सीटों पर वीरभद्र के करीबी मैदान में हैं।

उधर, कैबिनेट मंत्री कौल सिंह ठाकुर की सीट पर बगावत पार्टी की दूसरी बड़ी चिंता है। भाजपा के मुकाबले कांग्रेस में बगावत चार अतिरिक्त सीटों पर है। सूत्रों की मानें तो हाईकमान चुनाव प्रभारी सुशील कुमार शिंदे, सह प्रभारी रंजीत रंजन को दोनों खेमों में समन्वय बनाने के लिए शिमला भेज रही है।

दो दिनों में हाईकमान दोनों खेमों को मनाने में कितना कामयाब होगा, उसका असर नामांकन वापसी के दिन दिखेगा। बागियों को पार्टी से बाहर करने के लिए भी दोनों खेमों का दबाव रहेगा।
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