हिमाचल में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर प्रदेश के 18 विधानसभा क्षेत्रों में 26 प्रत्याशियों ने बगावत कर दी है। भाजपा और कांग्रेस के 13-13 बागी प्रत्याशी अपनी ही पार्टियों के घोषित प्रत्याशियों के खिलाफ बतौर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गए हैं।
इन बागियों के निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने से भाजपा और कांग्रेस को भितरघात होने का डर सता रहा है। कई विधानसभा क्षेत्रों में यह बागी भाजपा और कांग्रेस का समीकरण बिगाड़ने का मादा भी रखते हैं। 26 अक्तूबर नाम वापसी का आखिरी दिन है।
दोनों ही दलों के नेता अब इन बागियों को बिठाने की जुगत में लग गए हैं। कितने प्रत्याशियों को बिठाने में भाजपा और कांग्रेस को कामयाबी मिलती है। अब यह देखना दिलचस्प हो गया है। अगर यह बागी नहीं बैठे तो कई विधानसभा क्षेत्रों में मुकाबला त्रिकोणीय रहेगा।
भरमौर
कांग्रेस के बागी : जनम सिंह
भाजपा के बागी : ललित ठाकुर, ओपी शर्मा
कांग्रेस प्रत्याशी : ठाकुर सिंह भरमौरी
भाजपा प्रत्याशी : जियालाल
बगावत का कारण : भाजपा और कांग्रेस से तीन नेता टिकट की कतार में थे। कांग्रेस के टिकट आवंटन से नाराज होकर जनम सिंह और भाजपा से नाराज होकर ललित ठाकुर व ओपी शर्मा निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।
चंबा में ये हैं बागी
चंबा
भाजपा के बागी : बीके चौहान, डीके सोनी
भाजपा प्रत्याशी : पवन नैयर
कांग्रेस प्रत्याशी : नीरज नैयर
बगावत का कारण : बीके चौहान दो बार विधायक रह चुके हैं। डीके सोनी सरकारी सेवाएं छोड़ कर राजनीति में आए लेकिन भाजपा ने कांग्रेस से आए पवन नैयर को टिकट दिया। इसके चलते चंबा में बगावत हुई।
फतेहपुर में ये हैं बागी
फतेहपुर
भाजपा के बागी : बलदेव ठाकुर
भाजपा के प्रत्याशी : कृपाल परमार
कांग्रेस के प्रत्याशी : सुजान सिंह पठानिया
बगावत का कारण : बलदेव ठाकुर ने 2012 में चुनाव लड़ा था। पार्टी ने फतेहपुर के बाहर से संबंध रखने वाले कृपाल परमार को टिकट दिया। इसके चलते बलदेव निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गए हैं।
पालमपुर में ये हैं बागी
पालमपुर
भाजपा के बागी : प्रवीण कुमार
भाजपा प्रत्याशी : इंदु गोस्वामी
कांग्रेस प्रत्याशी : आशीष बुटेल
बगावत का कारण : प्रवीण कुमार बीते लंबे समय से पालमपुर में सक्रिय हैं। पालमपुर के बाहर से संबंध रखने वाली भाजपा नेत्री इंदु गोस्वामी को टिकट देने से प्रवीण नाराज होकर निर्दलीय खड़े हुए हैं।
लाहौल-स्पीति और मनाली में ये हैं बागी
लाहौल-स्पीति
कांग्रेस के बागी : राजेंद्र करपा
कांग्रेस के प्रत्याशी : रवि ठाकुर
भाजपा के प्रत्याशी : राम लाल मार्कंडेय
बगावत का कारण : जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेंद्र कांग्रेस से विधानसभा चुनाव के लिए टिकट नहीं मिलने से रुष्ट हैं। अपनी अनदेखी होने पर पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
मनाली
कांग्रेस के बागी : प्रेम शर्मा, धर्मवीर धामी
कांग्रेस के प्रत्याशी : हरि चंद शर्मा
बगावत का कारण : कांग्रेस ने 2012 में सीट गंवा दी थी। धामी और प्रेम मुख्यमंत्री के करीबियों में गिने जाते हैं। लेकिन इन दोनों को ही पार्टी ने टिकट नहीं दिया। धामी को पार्टी को निष्कासित किया गया है।
ये भी बागी हैं मनाली में
भाजपा के बागी : मोहिंद्र ठाकुर
भाजपा के प्रत्याशी : गोविंद ठाकुर
बगावत का कारण : भाजपा में इस बार टिकट के तलबगारों की मनाली में संख्या बढ़ गई थी। यहां गजेंद्र ठाकुर, हुक्म, मोहन लाल और मोहिंद्र दौड़ में थे। अब यह सभी निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गए हैं।
कुल्लू में ये हैं बागी
कुल्लू
कांग्रेस के बागी : रेणुका डोगरा
कांग्रेस प्रत्याशी : सुंदर सिंह ठाकुर
भाजपा प्रत्याशी : महेश्वर सिंह
बगावत का कारण : रेणुका बीडीसी सदस्य हैं। कांग्रेस में सक्रिय रही हैं। इनके परिजन लबे समय से कांग्रेस से जुड़े हैं। टिकट की दौड़ में शामिल थी लेकिन हाईकमान को गए पैनल में इनका नाम नहीं था।
नाचन और द्रंग में ये हैं बागी
नाचन
कांग्रेस के बागी : संजू डोगरा
कांग्रेस प्रत्याशी : लाल सिंह कौशल
भाजपा प्रत्याशी : विनोद कुमार
बगावत का कारण : 2012 में संजू डोगरा के पिता टेकचंद डोगरा ने चुनाव लड़ा था। संजू इस बार टिकट की दौड़ में शामिल थे लेकिन पार्टी ने सुंदरनगर कांग्रेस के उपाध्यक्ष को टिकट दिया।
द्रंग
कांग्रेस के बागी : पूर्ण चंद ठाकुर
कांग्रेस प्रत्याशी : कौल सिंह ठाकुर
भाजपा प्रत्याशी : जवाहर ठाकुर
बगावत का कारण : मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खास माने जाते हैं। कौल सिंह ठाकुर से संबंध अच्छे नहीं होने के चलते खुद के लिए टिकट की मांग की। टिकट नहीं मिलने पर बगावत की।
भोरंज और हरोली में ये हैं बागी
भोरंज
कांग्रेस के बागी : प्रेम कौशल
कांग्रेस प्रत्याशी : सुरेश कुमार
भाजपा प्रत्याशी : कमलेश कुमारी
बगावत का कारण : प्रेम वर्ष 1993 में कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। वर्तमान में वह एपीएमसी के चेयरमैन भी हैं। पार्टी ने इस बार सुरेश कुमार को प्रत्याशी बनाया है, इससे नाराज होकर कौशल बागी हुए
हरोली
भाजपा का बागी : रविंद्र मान
भाजपा प्रत्याशी : रामकुमार
कांग्रेस प्रत्याशी : मुकेश अग्निहोत्री
बगावत का कारण : पहली बार टिकट के लिए आवेदन किया। स्थानीय राजनीति में लंबे अरसे से सक्रिय हैं। टिकट नहीं मिलने पर बगावत करते हुए निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने का फैसला लिया।
ऊना सदर और बिलासपुर सदर में ये हैं बागी
ऊना सदर
कांग्रेस का बागी : राजीव गौतम
कांग्रेस प्रत्याशी : सतपाल सिंह रायजादा
भाजपा प्रत्याशी : सतपाल सिंह सत्ती
बगावत का कारण: राजीव गौतम के पिता दो बार ऊना से विधायक रहे हैं। 2012 में भी राजीव ने टिकट के लिए आवेदन किया था। दूसरी बार भी टिकट नहीं मिलने पर इस बार पार्टी से बगावत की।
बिलासपुर सदर
कांग्रेस के बागी : तिलक राज शर्मा
कांग्रेस प्रत्याशी : बंबर ठाकुर
भाजपा प्रत्याशी : सुभाष ठाकुर
बगावत का कारण : तिलक राज पूर्व विधायक हैं। 2002 में इन्होंने जेपी नड्डा को विधानसभा चुनाव में हराया था। ब्लाक कांग्रेस बिलासपुर ने इन्हें टिकट देने की वकालत की थी। टिकट नहीं मिलने पर बागी हुए।
नालागढ़ और रेणुका में ये हैं बागी
नालागढ़
कांग्रेस के बागी : हरदीप सिंह बावा
कांग्रेस प्रत्याशी : लखविंद्र सिंह राणा
भाजपा प्रत्याशी : केएल ठाकुर
बगावत का कारण : हरदीप बीते लंबे अरसे से क्षेत्र में सक्रिय हैं। मुख्यमंत्री के करीबियों में शामिल हैं। कांग्रेस के संगठन इंटक के प्रदेश अध्यक्ष हैं। लखविंद्र के 2012 में चुनाव हारने को मुद्दा बनाया।
रेणुका
भाजपा के बागी : ह्दय राम
भाजपा प्रत्याशी : बलवीर चौहान
कांग्रेस प्रत्याशी : विनय कुमार
बगावत का कारण : ह्दयराम रेणुका से विधायक रह चुके हैं। इसी आधार पर दोबारा टिकट की पैरवी की लेकिन पार्टी ने एससी मोर्चा के जिलाध्यक्ष और 2004 से सक्रिय मंडल सदस्य को टिकट दिया।
शिमला शहरी, रामपुर और कसुम्पटी में ये हैं बागी
शिमला शहरी
कांग्रेस के बागी : हरीश जनारथा
कांग्रेस प्रत्याशी : हरभजन सिंह भज्जी
भाजपा प्रत्याशी : सुरेश भारद्वाज
बगावत का कारण : हरीश जनारथा मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के कैंप से माने जाते हैं। भज्जी को आनंद शर्मा के गुट का माना जाता है। आनंद शर्मा ने जिला शिमला में एक सीट अपने आदमी को दिलाई है।
रामपुर
कांग्रेस के बागी: सिंघी राम
कांग्रेस प्रत्याशी : नंदलाल
भाजपा प्रत्याशी : प्रेम सिंह द्रैक
बगावत का कारण : कांग्रेस सरकार में पूर्व मंत्री रह चुके हैं। रामपुर विधानसभा क्षेत्र से लगातार छह बार जीत दर्ज की है। मुख्यमंत्री वीरभद्र से रिश्ते बिगड़ने के बाद से इन्हें कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया है।
कसुम्पटी
भाजपा का बागी : पृथ्वी विक्रम सेन
भाजपा प्रत्याशी : विजय ज्योति सेन
कांग्रेस प्रत्याशी : अनिरुद्ध सिंह
बगावत का कारण : पृथ्वी विक्रम सेन कसुम्पटी से भाजपा की टिकट की चाह में कांग्रेस छोड़ कर आए थे। पार्टी ने कसुम्पटी से इनकी भाभी ज्योति सेन को टिकट दिया। इस कारण यह निर्दलीय मैदान में उतरे हैं।