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धूमल, शांता, नड्डा खेमों की नहीं, मोदी-शाह की चली

Fri, 20 Oct 2017 01:07 PM IST
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, शिमला
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लंबे मंथन के बाद दिवाली से एक दिन पहले भाजपा ने 68 विधानसभाओं पर चेहरे उतार दिए। प्रत्याशी घोषित होने से पहले उठी बगावत की चिंगारी पर विराम लगाने की कोशिश की गई है। जारी सूची में प्रदेश के तीन दिग्गजों प्रेम कुमार धूमल, शांता कुमार और जेपी नड्डा की छाप नहीं दिख रही।
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मोदी और शाह ने सबकी सुनी, लेकिन की मन की है। दूसरे राज्यों की तरह हिमाचल में भी जिताऊ चेहरे का फार्मूला संघ और एजेंसियों का सर्वेक्षण ही रहा। चेहरे उतारने से पहले दिल्ली में पांच दिन चला मंथन असल में डैमेज कंट्रोल से निपटने का सियासी दांव साबित हुआ।

टीम शाह ने नाराज बताए जा रहे धूमल और शांता कैंप से फीडबैक लेने के लिए नड्डा को ब्रेकफास्ट और लंच डिप्लोमेसी के तहत उनके घर भेजा। दोनों को नड्डा ने शाह का संदेश दिया है, लेकिन प्रत्याशी चयन का फार्मूला नहीं बदला। 14 अक्तूबर को केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में मोदी और शाह से मिले टिप्स पर 18 अक्तूबर तक टॉप लीडरशिप में मंथन चला।
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चुनाव समिति के बाद केंद्रीय महामंत्री संगठन रामलाल ने संघ और एजेंसियों के सर्वेक्षणों के आधार पर सूची को अंतिम रूप दिया। प्रदेश के नेताओं धूमल और शांता को रामलाल ने स्पष्ट किया कि तय सूची में बदलाव संभव नहीं हैं। इसके बाद प्रदेश के नेता नेता हिमाचल लौट, लेकिन नड्डा के दिल्ली में रहने से चर्चा का बाजार गर्म हो गया कि प्रत्याशी फाइनल करने में उनकी चली।

इसके बाद लिस्ट जारी होने से पहले तीन प्रत्याशियों के नामांकन दाखिल करने से कई विधानसभाओं में बगावत का विस्फोट हुआ। शांता और धूमल खेमा टिकटों की सुगबुगाहट से रोने धोने पर उतर आया। हमीरपुर छोड़ सुजानपुर जाने के एलान से धूमल की आंखें नम हो गई तो शांता के करीबी किशन कपूर फूट-फूट कर रो पड़े।

शांता के घर पालमपुर में केंद्र की पसंद इंदु गोस्वामी के उतरने की सूचना उनके लिए दोहरा आघात माना जा रहा था। शाह के टिकट चयन के फार्मूले से प्रदेश में धूमल-शांता खेमा ही नहीं दर्जन भर नेता नाराज हो गए। बगावत से प्रत्याशियों के नाम बदलने की जगह पार्टी अपने स्टैंड पर कायम रही। शाह के संदेशवाहक के तौर पर नड्डा ने शांता और धूमल से मुलाकात की है। शाह के संदेश को देने के बाद दोनों खेमों के मानाने में काफी हद तक कामयाब भी रहे। 

तो ऐसे माने धूमल और शांता 
पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें से शाह ने धूमल और शांता को मनाने के लिए उनको कुछ आश्वासन दिए हैं। धूमल को भी कुछ बड़ा आश्वासन दिया है। बिलासपुर में पीएम रैली के बाद से बैकफुट पर आए धूमल कैंप को अब तरजीह मिलने वाली है। टिकटों में भी उनके किसी करीबी को बाहर नहीं किया गया है।

जोगिंद्रनगर में ठाकुर गुलाब सिंह, झंड़ूता में कटवाल को मिली तरजीह तो सुंदरनगर में टिकट राकेश जंबाल का टिकट इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, पार्टी उन्हें सीएम चेहरे के तौर पर घोषित नहीं करेगी, लेकिन उनको चुनाव प्रचार में तरजीह मिलेगी।

शांता कैंप को पालमपुर की एवज में धर्मशाला से उमेश दत्त की जगह किशन कपूर का नाम शामिल कर संतुष्ट करने की कोशिश की गई। इसके अलावा इंदौरा, ज्वालामुखी, सुलह, जयसिंहपुर को भी शांता कैंप से जोड़कर देखा जा रहा है। बिलासपुर से सुरेश चंदेल का टिकट कटने को नड्डा से जोड़कर देखा जा रहा है। शेष तीन सीटों पर भी उनकी राय अहम मानी जा रही है। 

इंदु ने सबको चौंकाया
पालमपुर में शांता कुमार के गढ़ में इंदु गोस्वामी के चयन ने सबको चौंका दिया है। महिला मोर्चे की प्रदेश अध्यक्ष को महिला कोटे से टिकट मिलने की बात कही जा रही है, लेकिन एक दम नई सीट से उनको उतारे जाने से कई सवाल खड़े हो गए हैं।

नड्डा, धूमल या शांता किसी भी कैंप से उनको जोड़कर नहीं देखा जाता है। नड्डा से बातचीत के बाद पालमपुर में शांता खेमे का विरोध झेल रही इंदु के साथ दूसरे दावेदार भी उनके प्रचार में जुटेंगे। सूत्रों की मानें तो उनके समर्थन में केंद्रीय नेताओं की जनसभाएं भी तय की जा रही हैं।
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