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हिमाचल में भाजपा के सीएम चेहरे पर जेटली ने दिया बड़ा बयान, पढ़िए क्या बोले

Mon, 30 Oct 2017 10:33 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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प्रदेश में भाजपा के मुख्यमंत्री चेहरे पर बने सस्पेंस के बीच वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि पार्टी ने रणनीति के तहत यह निर्णय लिया है। पार्टी के पास प्रदेश में कई अनुभवी नेता हैं। जीत कर आने के बाद एक अनुभवी नेता ही मुख्यमंत्री बनेगा। जेटली के इस बयान के अब सियासी मायने निकाले जा रहे हैं कि किस नेता की ओर उनका इशारा था।
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जेटली ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर वीरभद्र सरकार को जमकर घेरा। उन्होंने नाम लिये बिना कहा कि पिछले पांच वर्ष में सरकार की एकमात्र मंशा अपने आप और नेतृत्व को बचाए रखने की रही। सरकार के भीतर सत्ता की खींचतान रहा। बिना विश्वसनीयता के सरकार चली और बदले की भावना से काम किया गया।

भाजपा के विधानसभा चुनाव के लिए स्वर्णिम हिमाचल दृष्ट पत्र 2017 को जारी करने के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पत्रकार वार्ता में कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्ष में हिमाचल में सरकार नाम की कोई व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का केंद्र इतना कमजोर है कि प्रदेश का नेतृत्व अपनी कुर्सी बचाने के लिए उसे ब्लैकमेल करता रहा।
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भाजपा ‌को 5 साल में करना होगा 10 साल का काम

भाजपा को राज्य में शासन की विश्वसनीयता को दोबारा कायम करना है। उन्होंने कहा कि सरकार विकास के मोर्चे के साथ कानून व्यवस्था के मुद्दे पर फेल हुई। भाजपा को अगले पांच साल में 10 साल का काम करना होगा।

सुखराम को पार्टी में लेने के सवाल पर वित्त मंत्री ने कहा कि पार्टी का स्पष्ट मत है कि भ्रष्टाचार से कोई समझौता नहीं होगा। अनिल शर्मा भाजपा से चुनाव लड़ रहे हैं और उनपर कोई भ्रष्टाचार का मामला नहीं है।

वीरभद्र के जेटली और धूमल पर उनके खिलाफ झूठे मामले करवाने के सवाल पर जेटली बोले कि तब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, जिस दौरान का यह मामला है। उसी दौरान उनके खिलाफ जांच बैठी और तथ्य सामने आए। उन्होंने चुटकी लेता हुए कहा कि जेटली या धूमल ने उनको सलाह नहीं दी कि स्कूटर पर सेब की ढुलाई करें।
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कश्मीर की स्वायत्तता मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा

भाजपा का मुद्दा वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि कांग्रेस का कश्मीर की स्वायत्तता के विषय को वर्ष 2017 में उठाने के पीछे क्या औचित्य है। यूपीए में रहे गृहमंत्री के कश्मीर की स्वायत्तता का पक्ष लेने को जेटली ने कांग्रेस की नासमझी बताया।

कश्मीर विधानसभा के किन अधिकारों को बढ़ाने की बात कांग्रेस कर रही है। रक्षा, वित्त, विदेश मामले आदि छोड़कर सब जम्मू कश्मीर विधानसभा में निहित है। स्वायत्तता के मायने 1953 से पहले का दर्जा है, जिसमें उनके अपने पीएम बनाने का प्रावधान है।

चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट प्रभावी नहीं होगा। जेटली ने सवाल किया कि कांग्रेस यह चाहती है। गुजराज में आईएसआईएस और अब हिमाचल में कश्मीर के मुद्दे को उठाने के सवाल पर जेटली ने कहा कि वे चुनावी राजनीति नहीं कर रहा हूं। राष्ट्रीय सुरक्षा हमेश भाजपा के एजेंडे में है। 
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