हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र की कार्यवाही सोमवार दोपहर बाद 2 बजे शुरू हुई। राष्ट्रगान के बाद अभिभाषण के पहले दो पैराग्राफ पढ़ते हुए राज्यपाल ने कहा कि इस साल के प्रथम सत्र और 14वीं विधानसभा के 11वें सत्र को संबोधित करते हुए हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। सभी सदस्यों के माध्यम से मैं प्रदेशवासियों की खुशहाली व समृद्धि की कामना करता हूं। इस सत्र का आयोजन वर्ष 2025-26 के लिए अनुपूरक अनुदान मांगें, वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान पारित करने और महत्वपूर्ण विधायी कार्य के लिए किया गया है। कहा, आप सभी अपने अनुभवों से मेरी सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों पर रचनात्मक विचार-विमर्श करने की उच्च परपंराओं को बनाए रखेंगे। इसके बाद राज्यपाल ने अभिभाषण के आखिरी पैराग्राफ को पढ़ते हुए कहा कि मैं पूरी तरह से आश्वस्त हूं कि राज्य के लोगों के हित और प्रदेश को विकास एवं खुशहाली की राह पर आगे ले जाने के लिए मेरी सरकार के प्रयासों को आप अपना पूर्ण सहयोग देंगे। राज्यपाल का यह अभिभाषण दो मिनट एक सेकेंड में खत्म हो गया। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सदन की कार्यवाही को 2:45 बजे तक स्थगित कर दिया। इसके बाद सदन में प्रदेश सरकार की ओर से आरडीजी पर नियम 102 के तहत लाए गए प्रस्ताव पर अड़ने के बाद विपक्ष भी चर्चा के लिए तैयार हो गया। सत्र के पहले दिन नगर निगम संशोधन विधेयक और भू-संपदा संशोधन विधेयक ध्वनिमत से पारित भी किए गए।
पूर्व सरकार के समय भी पढ़ा हुआ माना गया था अभिभाषण : सुक्खू
विधानसभा परिसर में मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि पूर्व सरकार के समय भी राज्यपाल के अभिभाषण को पढ़ा हुआ माना गया था। सरकार की उपलब्धियां जनता तक पहुंचनी चाहिए, जब धरातल पर काम दिखता है तो जनता को पता चल जाता है। वो ही हमारी उपलब्धि होती है। उन्होंने कहा कि आरडीजी हिमाचल का अधिकार है, खैरात नहीं। आय और व्यय के अंतर को पाटने के लिए आरडीजी दी जाती है। सत्र के पहले चरण में आरडीजी पर चर्चा करनी है। हमने भाजपा का रूख देखना है, वो मान जाते हैं तो पीएम के पास जाएंगे। जिन अन्य 16 राज्यों में आरडीजी बंद हुई है, उनके पास बड़े प्रोजेक्ट हैं। हिमाचल की 90 फीसदी भूमि पहाड़ी है। यहां बड़े प्रोजेक्ट नहीं लग सकते। 2026 से 2031 तक के लिए आरडीजी है। यह सांविधानिक अधिकार है। आर्टिकल 275/2 में यह अधिकार दिया गया है। यह कहना है कि आरडीजी पहले ही बंद करने की बात हुई थी, गलत है।
नोकझोंक के बाद आखिर थमा गतिरोध, आरडीजी पर चर्चा के लिए विपक्ष तैयार
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन सोमवार को करीब चार बजे सत्तापक्ष और विपक्ष की लंबी बहस व नोकझोंक के बाद गतिरोध आखिर थम गया। पहले केवल राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के लिए अड़ा रहा विपक्ष बाद में राजस्व घाटा अनुदान पर लाई चर्चा में शामिल हो गया। राज्यपाल के अभिभाषण के खत्म होने के बाद पौने तीन बजे तक सदन की कार्यवाही स्थगित की गई। इसके बाद स्वीकृत विधेयकों को सदन के पटल पर रखा गया। दो विधेयकों को राज्यपाल की टिप्पणी के बाद पुनर्विचार के लिए रखा गया और इन्हें संशोधित रूप में पारित करने का प्रस्ताव किया गया। उसके बाद नियम 102 के तहत आरडीजी बंद किए जाने पर चर्चा का प्रस्ताव लाने की स्पीकर ने बात की तो नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के नेतृत्व में विधायक दल ने कहा कि इस प्रस्ताव के बजाय राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा करवाएं। फिर राज्य सरकार की ओर से राजस्व घाटा अनुदान पर लाए गए प्रस्ताव पर विपक्ष चर्चा के लिए तैयार हो गया। पहले नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर इस बात पर अड़े रहे कि राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा करवाई जाए।
हिमाचल के स्टेटहुड को खतरा, कहीं यह शुरुआत तो नहीं : हर्षवर्धन
सदन की यह परंपरा रही है। इस पर स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि वर्ष 2019-20 में ऐसा किया जा चुका है। यानी राज्यपाल के अभिभाषण के बाद भी दूसरे विधायी कार्य हुए हैं। नियमानुसार ऐसा किया जा सकता है। कहा कि केंद्र सरकार की ओर से हिमाचल के लिए राजस्व घाटा अनुदान बंद किया गया है, जिस पर नियम 102 के तहत प्रस्ताव दिया गया है। इस प्रस्ताव पर मतदान होगा, जबकि राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर होने वाली चर्चा में मतदान नहीं होता है। इस विषय को प्राथमिकता देते हुए इस पर चर्चा शुरू की जाती है। चर्चा की शुरुआत संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने की। उन्होंने नियम 102 के तहत प्रस्ताव पेश कर आरडीजी की बहाली का मामला केंद्र सरकार के समक्ष रखने की बात की। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों का यह मानना है कि राजस्व घाटा अनुदान को बंद करने जैसे केंद्र सरकार के कदमों से हिमाचल के स्टेटहुड को खतरा है। कहीं यह शुरुआत तो नहीं है। सब जानते हैं कि जम्मू-कश्मीर में क्या हुआ। आज वहां राज्य से दर्जा घटाकर उसे यूटी बना दिया गया है। उन्होंने विपक्ष की ओर इशारा कर कहा - हिमाचल रहेगा तो हम सब रहेंगे। उन्होंने कहा कि सभी इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री के पास चलें।