अदालत ने स्पष्ट किया कि अभिभावक शिक्षक संघ के तहत हुई नियुक्ति अनुभव प्रमाणपत्र को नजरअंदाज करने का आधार नहीं हो सकती, जब प्रमाणपत्र स्कूल प्रिंसिपल की ओर से विधिवत जारी किया गया हो। याचिकाकर्ता को 3.66 अंक मिले थे। एक अन्य उम्मीदवार को 3.75 अंक प्राप्त होने के आधार पर नियुक्त कर दिया गया था। पर अदालत ने कहा कि यदि शिक्षण अनुभव को जोड़ा जाता तो याचिकाकर्ता का कुल स्कोर 5.16 हो जाता। यह चयनित उम्मीदवार से अधिक था। न्यायालय ने माना कि अनुभव अंक न मिलने से याचिकाकर्ता के साथ अन्याय हुआ। अदालत ने आठ वर्षों से सेवाएं दे रही और नियमित की जा चुकी निजी प्रतिवादी की नियुक्ति को सुरक्षित रखा। न्यायमूर्ति ने कहा कि प्रतिवादी की कोई गलती नहीं थी और उन्होंने कोई गलत जानकारी नहीं दी थी।