एंबुलेंस कर्मियों की पांच दिन से जारी हड़ताल और शिमला में महापड़ाव शुक्रवार को समाप्त हो गया है। सीटू के बैनर तले प्रदेशभर के सैकड़ों कर्मचारी सचिवालय छोटा शिमला के बाहर विपरीत माैसम में भी डटे रहे। हड़ताल के दौरान प्रदेशभर में एंबुलेंस सेवाएं बाधित रहीं, जिससे आम जनता को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। शुक्रवार को एंबुलेंस कर्मियों ने कसुम्पटी में करीब दो घंटे तक एनएचएम कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान एनएचएम के उप निदेशक के साथ यूनियन प्रतिनिधियों की बैठक हुई, जिसमें एक सप्ताह के भीतर यूनियन, एनएचएम और मेडस्वान फाउंडेशन प्रबंधन के बीच बैठक आयोजित कर मांगों के समाधान का आश्वासन दिया गया।
साथ ही ट्रांसफर और नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों की बहाली और हड़ताल के दौरान प्रताड़ित कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई रोकने की बात भी कही गई। यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि मेडस्वान फाउंडेशन के अधीन कार्यरत पायलट, कैप्टन और ईएमटी कर्मचारियों का लंबे समय से शोषण हो रहा है। कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन नहीं मिल रहा और 12 घंटे की ड्यूटी के बावजूद ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जा रहा। इसके अलावा ईपीएफ और ईएसआई में भी अनियमितताएं सामने आई हैं। इस दाैरान सीटू के प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, महासचिव प्रेम गौतम, यूनियन अध्यक्ष सुनील कुमार, महासचिव बालक राम सहित अन्य पदाधिकारियों ने एंबुलेंस कर्मियों को संबोधित भी किया।