पारूल ने इसकी जानकारी भारतीय पुरातत्व विभाग शिमला और उपायुक्त मंडी को भेजकर शिलालेख के वैज्ञानिक संरक्षण की मांग की है। जिला प्रशासन ने इस विषय को भाषा विभाग को भेज दिया है, ताकि इसका आधिकारिक अनुवाद और विस्तृत अध्ययन आगे बढ़ सके। पारूल का कहना है कि इस लेख में शारदा मूल के अनेक संयुक्त अक्षर मौजूद हैं, जिनके अध्ययन में एआई ने काफी सहारा दिया। उन्होंने प्रदेश के विभिन्न मंदिरों में मौजूद टांकरी शिलालेखों को भी एआई की सहायता से देवनागरी में रूपांतरित करने की मांग की है।
पहले शिलालेख को पढ़कर शब्द निकाले। इसके बाद शब्द संस्कृत में बनाए। कई एआई टूल की मदद से शब्दों व लाइनों को जोड़ने के बाद डेढ़ साल बाद इसमें सफलता मिली। सॉफ्टवेयर को इन प्राचीन धरोहरों के लिए बनाया जाना चाहिए, ताकि प्राचीन धरोहरों को नई पीढ़ी के सामने लाया जा सके। - पारूल अरोड़ा
तीन मुख वाली मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है त्रिलोकीनाथ मंदिर
मंडी का त्रिलोकीनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर त्रिमुखी (तीन मुख वाली) शिव की मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है, जिस कारण मंदिर का नाम त्रिलोकीनाथ पड़ा। यह मंडी के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है और इसे 1520 ईस्वी में राजा अजबर सेन की रानी सुल्तान देवी ने बनवाया था। यह मंदिर पुरानी मंडी में बस स्टैंड से लगभग एक किलोमीटर दूर ब्यास नदी के किनारे पर स्थित है। यह मंदिर भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित है।