उच्चतर शिक्षा परिषद बिल पर चर्चा के दौरान ठियोग के विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि यूजीसी जैसी संस्थाएं देश में उच्चतर शिक्षा के लिए काम कर रही हैं। ऐसे में इस परिषद के गठन का कोई औचित्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि बिल को कॉपी-पेस्ट से बनाया गया है। इससे अच्छा बिल तो केजी का बच्चा भी बना लेता है। वहीं सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने परिषद की बैठक छह माह की वजाए तीन माह में करने और विधायक जगत सिंह नेगी बिल को सलेक्ट कमेटी में भेजने की मांग की।
सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में 12 निजी विवि संचालित हो रहे हैं। परिषद में उन्हें शामिल नहीं किया गया है। वहीं, उन्होंने कहा कि प्रदेश की भौगोलिक परिस्थतियों को देखते हुए परिषद की बैठक छह माह में एक बार करना उचित नहीं है। बैठक तीन में होनी चाहिए।
जगत सिंह नेगी ने परिषद के गठन के बहाने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार के ही कई मंत्री जब विपक्ष में थे, तो बोर्ड-निगमों में नियुक्तियों पर सवाल उठाते थे।
लेकिन, वर्तमान जयराम सरकार के राम राज्य में सरकार ने पुराने बोर्डोें और निगमों में अध्यक्षों और उपाध्यक्षों की नियुक्तियां कर दी हैं। अब नए बोर्ड-निगम गठित कर सरकार का खर्च और बढ़ाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार परिषद का गठन कर विभाग को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।