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रिश्वत केस: डायरेक्टर को पकड़ने के लिए CBI ने की थी ये हाईटेक प्लानिंग

Wed, 31 May 2017 10:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़/बद्दी (सोलन)
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उद्योग विभाग के जाइंट डायरेक्टर को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ने के लिए सीबीआई ने हाईटेक प्लानिंग की थी। इस मामले में शिकायतकर्ता चंडीगढ़ मनीमाजरा निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट चंद्रशेखर हैं। 27 मई को उन्होंने सीबीआई के सेक्टर-30 स्थित दफ्तर में एसपी रामगोपाल को शिकायत दी थी।
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शिकायत में उन्होंने कहा था कि वह बतौर चार्टर्ड अकाउंटेंट बद्दी स्थित मैसर्स मेडिसेफ फार्मा को सेवाएं दे रहे हैं। 28 मार्च 2017 को उन्होंने इंडस्ट्री विभाग के संयुक्त निदेशक तिलकराज शर्मा को सब्सिडी देने संबंधी फाइल जमा की थी। भारत सरकार के नियमों के तहत कंपनी में नई मशीनरी के 15 फीसदी पर सरकार सब्सिडी देती है।

यह सब्सिडी राशि 50 लाख रुपये के करीब बनती है। शिकायत के मुताबिक जेडी तिलकराज शर्मा ने उन्हें अशोक राणा का मोबाइल नंबर दिया और कहा कि यदि उन्हें सब्सिडी चाहिए तो रिश्वत के तौर पर उन्हें 10 लाख रुपये देने होंगे। संयुक्त निदेशक ने उनकी कंपनी को 19 मई को एक नोटिस भी जारी कर दिया।
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चंद्रशेखर ने रिश्वत देने की बजाय सीबीआई को इसकी शिकायत कर दी। सीबीआई ने जांच की तो रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि हुई। आपको बता दें कि हिमाचल के जिला सोलन के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी में तैनात उद्योग विभाग के जाइंट डायरेक्टर तिलकराज शर्मा और उसके एक सहयोगी को सीबीआई ने चंडीगढ़ में पांच लाख रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।

सीबीआई ने कैसे की पूरी प्लानिंग

बता दें कि सीबीआई ने पूरी प्लानिंग के तहत तिलकराज को रंगे हाथ पकड़ा है। एजेंसी ने ट्रैप से पहले शिकायतकर्ता चंद्रशेखर को डील फाइनल करने के बहाने अधिकारी और बिचौलिए का काम कर रहे उद्योगपति अशोक राणा के पास भेजा। 

27 मई को जांच एजेंसी ने चंद्रशेखर को डिजिटल वाइस रिकॉर्डर और स्पाई वीडियो कैमरा मुहैया कराया था। प्रारंभिक जांच में रिकार्डिगिं का उल्लेख किया गया है।    जिसमें साफ तौर पर तिलकराज ने चंद्रशेखर से घूस के दस लाख रुपयों को दो किश्तों में देने को कहा था। पहली किश्त सोमवार तक देनी थी जबकि दूसरी किश्त बाद में दी जानी थी।

पूछताछ में कई बड़े अफसरों और नेताओं के नाम

इसके बाद सीबीआई ने ट्रैप बिछाया और रिश्वत देने के लिए संयुक्त निदेशक को चंडीगढ़ बुलाया। चंडीगढ़ में सेक्टर-19 सी में ही उसका  घर है। सोमवार को संयुक्त निदेशक सेक्टर-8 स्थित एक सैलून के बाहर पार्किंग में रिश्वत की रकम लेने आया। वहां जैसे ही सीए ने उसे पैसे दिए सीबीआई ने उसे रंगे हाथ रिश्वत लेते दबोच लिया।

वहीं उसकी निशानदेही पर इंडस्ट्रिलिस्ट और सह आरोपी अशोक राणा को भी सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया। सीबीआई के प्रवक्ता आरके गौड़ ने संयुक्त निदेशक तिलक राज शर्मा समेत दो को गिरफ्तारी करने की पुष्टि की है। सीबीआई ने दोनों आरोपियों को जिला अदालत में पेश कर उनका दो दिन का रिमांड हासिल किया है।

सूत्रों का कहना है कि पूछताछ में अधिकारी ने कई बड़े अफसरों और नेताओं के भी नाम लिए हैं। ऐसे में इस मामले में कई बड़े नेता, अफसर भी सीबीआई के लपेटे में आ सकते हैं।सूत्रों के अनुसार इस मामले में दिल्ली स्थित मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का कार्यालय भी सीबीआई की जांच के दायरे में आ सकता है।

अमर उजाला ने इस संबंध में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निजी सचिव रघुवंशी का पक्ष जानने के लिए संपर्क किया, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया। मुख्यमंत्री के दफ्तर से भी इस बारे में अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
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चंडीगढ़, बद्दी में दबिश, सोना-चांदी, लॉकरों की चाबियां मिलीं

गिरफ्तारी के बाद सीबीआई की दो टीमों ने आरोपी अधिकारी के चंडीगढ़ और बद्दी के ठिकानों पर दबिश दी। सूत्रों के अनुसार अधिकारी के चंडीगढ़ के सेक्टर-19 के फ्लैट में 38960 रुपये कैश, यूएस-यूरो डॉलर, 17 तोला सोना, 350 ग्राम चांदी, एलआईसी पॉलिसी और बैंक लॉकरों की चाबियां मिली हैं। 

फ्लैट में मिले प्रॉपर्टी के दस्तावेजों की छानबीन जारी है। उधर, सीबीआई की टीम ने मंगलवार दोपहर बाद करीब चार बजे बद्दी स्थित उद्योग विभाग के कार्यालय में भी दबिश दी। यहां सारा रिकॉर्ड खंगाला गया और जरूरी कागजात अपने साथ ले गई। आरोपी के औद्योगिक क्षेत्र में तैनाती के बाद से अब तक के सारे रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। यह अधिकारी लंबे समय से औद्योगिक क्षेत्र में था।
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