18 नवंबर 2004 को उपनिदेशक शिक्षा ने स्कूल का निरीक्षण किया, जिसमें 20 में से 13 शिक्षक गायब पाए गए। प्रार्थी ने कारण बताओ नोटिस के जवाब में बताया कि उसकी घर पर नौकरानी न आने के कारण उसे अपने 2 वर्षीय बच्चे की देखरेख के लिए उस दिन घर पर रहना पड़ा।
इस जवाब से विभाग संतुष्ट नहीं हुआ और प्रार्थी के अनुपस्थिति के उस कार्यकाल को उसकी सेवा से हटाने के आदेश जारी कर दिए। प्रार्थी ने इन आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
सिंगल जज ने प्रार्थी की याचिका को खारिज करते हुए नौकरानी का छुट्टी पर जाना स्कूल से अनुपस्थित रहने का कोई उचित कारण नहीं माना था। प्रार्थी ने सिंगल बेंच के फैसले को डिवीजन बेंच के समक्ष चुनौती दी थी।
डिवीजन बेंच ने भी प्रार्थी की अपील को खारिज करते हुए जनहित में शिक्षा विभाग से शिक्षकों की छुट्टियों से जुड़ी जरूरी प्रक्रियाओं पर स्पष्टीकरण मांगा था। न्यायालय को शपथ पत्र के माध्यम से बताया गया कि स्कूल से नदारद रहने वाले 5 शिक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई गई।
चार के खिलाफ जांच अभी लंबित है एक को विभागीय तौर पर दंडित भी किया गया है। न्यायालय ने राज्य सरकार की ओर से की गई कार्रवाई से संतुष्ट होते हुए अपील पर सुनवाई बंद कर दी।