फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अवैध बर्खास्तगी पर हाईकोर्ट सख्त: कंपनी को देना होगा 50 फीसदी बैक वेज, ब्याज भी चुकाना होगा

Wed, 07 Oct 2026 06:04 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि सेवा समाप्ति अवैध पाई जाती है तो नियोक्ता अपनी गलती का लाभ उठाकर पिछले वेतन की देनदारी से बच नहीं सकता। कोर्ट ने कंपनी और कर्मचारियों दोनों की क्रॉस अपीलें खारिज करते हुए एकल पीठ के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें 50 फीसदी बैक वेज और उस पर ब्याज देने का आदेश दिया गया था।
विज्ञापन
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अवैध रूप से बर्खास्त किए गए कर्मचारियों के मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि सेवा समाप्ति अवैध पाई जाती है तो नियोक्ता अपनी गलती का लाभ उठाकर पिछले वेतन की देनदारी से बच नहीं सकता। कोर्ट ने कंपनी और कर्मचारियों दोनों की क्रॉस अपीलें खारिज करते हुए एकल पीठ के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें 50 फीसदी बैक वेज और उस पर ब्याज देने का आदेश दिया गया था। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मैसर्स बायोगेनेटिक ड्रग्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके सात कर्मचारियों रघबीर सिंह, संदीप कुमार, सुरिंदर पाल, सुरजीत कुमारी, राकेश कुमार, विक्रम सिंह और प्रीति चंद की अपीलों पर यह फैसला सुनाया।

विज्ञापन
Trending Videos
विज्ञापन

कंपनी का आरोप था कि अगस्त 2009 में इन ऑपरेटरों और हेल्परों ने फैक्टरी में काम रोककर अन्य श्रमिकों को हड़ताल के लिए उकसाया था। घरेलू जांच के बाद मार्च और जुलाई 2010 में सभी को बर्खास्त कर दिया गया। हालांकि, लेबर कोर्ट शिमला ने दिसंबर 2015 में पाया कि कंपनी की घरेलू जांच प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थी। लेबर कोर्ट ने 2018 में कर्मचारियों को वरिष्ठता और सेवा निरंतरता के साथ बहाल करने का आदेश दिया, लेकिन पिछला वेतन देने से इन्कार कर दिया। इसके खिलाफ कर्मचारी हाईकोर्ट पहुंचे। एकल पीठ ने कंपनी को 50 फीसदी बैक वेज और उस पर ब्याज देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कर्मचारियों की सेवा अवधि और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए 50 फीसदी बैक वेज और ब्याज के आदेश को उचित माना तथा दोनों पक्षों की अपीलें खारिज कर दीं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें