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शिक्षकों के हजारों पद न भरने पर कोर्ट की हिमाचल सरकार पर तल्ख टिप्पणी

Sun, 20 Oct 2019 11:58 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल हाईकोर्ट ने भरी अदालत में टिप्पणी करते हुए कहा कि क्या राज्य सरकार शिक्षकों से जुड़े भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में संशोधन करने के लिए संविधान में संशोधन करने जितना जटिल कार्य कर रही है?

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प्रदेश भर के स्कूलों में शिक्षकों के हजारों पद न भरने के मामले में हाईकोर्ट ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तलख टिप्पणी की है। मामले पर सुनवाई 25 नवंबर को निर्धारित की गई है।

हाईकोर्ट ने गत 26 जून को सरकार को आदेश दिए थे कि शिक्षकों से जुड़े आरएंडपी नियमों में आठ सप्ताह में संशोधन करे। इसके बाद संशोधित नियमों के अनुसार शिक्षक भर्ती की जाए। नियमों में संशोधन करने के लिए सरकार ने इस बार फिर से तीन महीने की मांग की थी।
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इस पर मुख्य न्यायाधीश लिंगप्पा नारायण स्वामी और न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी की खंडपीठ ने राज्य सरकार को आदेश दिए कि वह स्कूलों में खाली पड़े पदों को इसी शैक्षणिक सत्र में भरे।
 

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राज्य सरकार की ओर से न्यायालय को बताया गया कि जेबीटी, एलटी, शास्त्री, टीजीटी आर्ट्स, टीजीटी नॉन मेडिकल और टीजीटी मेडिकल के कुल 4491 पद 31 जुलाई, 2019 तक खाली थे। 736 पद 31 जुलाई 2019 तक रिटायरमेंट और प्रमोशन की वजह से खाली हुए।

3132 शिक्षकों के पदों को भरने के लिए प्रक्रिया जारी है। 2095 पदों को भरने के लिए पहले ही जरूरी स्वीकृति ले ली गई है। गौरतलब है कि शिक्षा सचिव ने शपथ पत्र देकर अदालत को बताया था कि हिमाचल में शिक्षकों के 14,354 पद खाली हैं।

इनमें से प्राथमिक स्कूलों में अध्यापकों के 25293 स्वीकृत पदों में से 1754 पद खाली चल रहे हैं। इसी तरह अपर प्राइमरी में अध्यापकों के 16185 स्वीकृत पदों में से 2499 पद खाली हैं।

सी एंड वी के 16901 स्वीकृत पदों में 5277 पद खाली हैं। मंडी जिले के निहरी तहसील के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला दोघरी में अध्यापकों के खाली पदों को उजागर करने वाले मामले में प्रदेश हाईकोर्ट ने उक्त आदेश पारित किए।
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