प्रदेश हाईकोर्ट ने आबकारी एवं कराधान विभाग की 8 सेवाएं लोक मित्र केंद्रों से न लिए जाने पर सरकार से एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने प्रवीण कुमार की ओर से दायर याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के बाद सरकार से यह स्पष्टीकरण मांगा है।
प्रार्थी के अनुसार 31 जुलाई 2012 को राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर वैट और इससे मिलती जुलती सेवाओं सहित फॉर्म 26 ए व फार्म 27 को डाउनलोड करने, वैट की ई रिटर्न व अन्य रिटर्न जैसी 8 सेवाएं लोक मित्र केंद्रों के माध्यम से लिए जाने का प्रावधान किया था। 8 अगस्त 2012 को एक सर्कुलर जारी कर आबकारी एवं कराधान आयुक्त ने सभी संबंधित अधिकारियों को आदेश दिए थे कि वे सभी लोक मित्र केंद्रों को ऑनलाइन जोड़ें।
लोक मित्र केंद्र का संचालन करने वाले प्रार्थी को सूचना के अधिकार के तहत वर्ष 2014 में बताया गया कि उपरोक्त 8 सेवाएं शीघ्र ही लोक मित्र केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध करवा दी जाएगी। प्रार्थी का आरोप है कि आज तक कोई भी इस तरह की सेवा लोक मित्र केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध नहीं करवाई जा रही है। इसी के आधार पर कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है।