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Himachal: हाईकोर्ट ने कहा- सरकार के जवाब दाखिल करने के अधिकार में कटौती नहीं कर सकता ट्रिब्यूनल

Tue, 24 Mar 2026 06:00 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

हाईकोर्ट ने कहा है कि प्रशासनिक ट्रिब्यूनल किसी भी कानूनी विवाद में राज्य सरकार के जवाब दाखिल करने के अधिकार को कम या समाप्त नहीं कर सकता। 
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि प्रशासनिक ट्रिब्यूनल किसी भी कानूनी विवाद में राज्य सरकार के जवाब दाखिल करने के अधिकार को कम या समाप्त नहीं कर सकता। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने राज्य बनाम गीता देवी मामले में ट्रिब्यूनल के 9 अप्रैल 2019 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सरकार का पक्ष सुने बिना ही एक कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाया गया था। हाईकोर्ट ने माना कि मूल आवेदन न केवल देरी से दायर किया गया था, बल्कि ट्रिब्यूनल ने प्रक्रियात्मक त्रुटि भी की थी। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका को स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया।

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गीता देवी ने साल 2019 में ट्रिब्यूनल के समक्ष एक याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने 1996 में मातृत्व अवकाश और 1998 में बीमारी के कारण हुए सेवा अंतराल को निरंतर सेवा मानने की मांग की थी। ट्रिब्यूनल ने उसी दिन राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का मौका दिए बिना याचिका स्वीकार कर ली और कर्मचारी को 10 साल की सेवा के आधार पर वर्क चार्ज स्टेटस और अन्य लाभ देने का आदेश दे दिया।
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खंडपीठ ने पाया कि ट्रिब्यूनल ने सरकार को पक्ष रखने या जवाब दाखिल करने का अवसर दिए बिना ही मामला निपटा दिया। अदालत ने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया। अदालत ने कहा कि हम ट्रिब्यूनल की ऐसी कार्यप्रणाली का समर्थन नहीं कर सकते। अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि प्रशासनिक न्यायाधिकरण अधिनियम, 1985 की धारा 21 के तहत ट्रिब्यूनल को ऐसी याचिकाओं को स्वीकार करने पर रोक है जो समय सीमा के बाहर हो।
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