हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने किन्नौर के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को कोर्ट की अवमानना के मामले में नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने दोनों अफसरों को 21 मार्च को कोर्ट में उपस्थित रहने के आदेश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह की खंडपीठ ने अमर सिंह की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद रिब्बा गांव के तीन लोगों को भी कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।
अवमानना याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार रिब्बा गांव के कुछ लोगों का साल 2008 में सामाजिक बहिष्कार किया गया था। इस कारण इन लोगों का देवता कंसराज और लागंग मंदिर में प्रवेश पर रोक लगा दी थी। इस रोक के खिलाफ कुछ लोगों ने साल 2014 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट के आदेशानुसार जिला प्रशासन ने मंदिरों को हर प्रकार की पूजा के लिए खुलवा दिया, लेकिन प्रार्थी के अनुसार 11 अप्रैल 2015 को पूर्व बहिषकृत परिवार की एक महिला की मौत होने पर स्थानीय लामा ने अंतिम धार्मिक संस्कार में शामिल होने से मना कर दिया।
मंदिर भंडार से बर्तन भी नहीं दिए गए। इसका कारण उनका सामाजिक बहिष्कार बताया गया। पुलिस में शिकायत करने के बाद जांच अधिकारी ने आपराधिक मामला होने से इंकार किया और कोर्ट में मामला उठाने की सलाह दे डाली।
पुलिस अधीक्षक किन्नौर ने भी उनकी कोई सहायता नहीं की और अदालत का रास्ता अपनाने को कहा। हाईकोर्ट ने अधिकारियों के उदासीन रवैये पर हैरानी जताते हुए दोनों अधिकारियों को 21 मार्च को कोर्ट में तलब किया है।