दोनों ही कमेटियों के खिलाफ आरोप है कि उन्होंने सरकार की अनुमति और हिमाचल नगर सेवा अधिनियम 1994 के विपरीत साक्षात्कार लेकर फर्जी दस्तावेज तैयार कर अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरियां दीं। सात जून 2003 को तत्कालीन मुख्यमंत्री के ध्यान में मामला लाया गया और एसपी सतर्कता साउथ जोन शिमला का जांच के लिए मामला सौंपा।
पुलिस उपाधीक्षक राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने जांच रिपोर्ट सौंपी और दो दिसंबर 2016 को सरकार तथा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो सोलन के समक्ष सभी आरोपियों के खिलाफ धारा 420, 468, 471, 120 बी और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13 (1) डी व 13 (2) में मामला दर्ज किया। अंतिम रिपोर्ट 17 जुलाई, 2013 को कोर्ट में रखी।
अभियोजन पक्ष की ओर से सात सितंबर 2018 को बिंदल और अन्य पर दर्ज मामला वापस लेने के लिए विशेष जज सोलन के समक्ष आवेदन दाखिल किया। स्पेशल जज सोलन ने 24 जनवरी 2019 को अभियोजन पक्ष की ओर से दायर आवेदन स्वीकार करने के बाद मामला वापस लेने की अनुमति दी। 24 जनवरी 2019 को पारित इस फैसले को हाईकोर्ट के समक्ष याचिका के माध्यम से चुनौती दी है।