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विधानसभा अध्यक्ष बिंदल को हाईकोर्ट का नोटिस, पढ़ें पूरा मामला

Sat, 04 May 2019 08:49 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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भ्रष्टाचार से जुड़ा मामला वापस लेने की अनुमति प्रदान करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष राजीव बिंदल और अन्य को नोटिस जारी किया है।

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न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर ने अर्की निवासी पवन ठाकुर की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के दौरान आदेश पारित किए। बिंदल और अन्य पर आरोप रहे हैं कि 30 अप्रैल, 1998 को नगर परिषद सोलन में विभिन्न पद भरने के लिए चयन कमेटी बनी। बिंदल कमेटी के अध्यक्ष थे।

दूसरे सदस्यों में पार्षद देवेंद्र ठाकुर और हेमराज गोयल थे। एक अन्य सदस्य सुभाष चंद कलसोत्रा अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी सोलन थे, जिनके पास कार्यकारी अधिकारी नप सोलन का कार्यभार था।
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तीन जून 2000 को एक अन्य चयन कमेटी का गठन किया, जिसकी अध्यक्षता प्रधान जंगी लाल सोलन नप ने की। उसमें पुरुषोत्तम दास चौधरी कार्यकारी अधिकारी, ललित मोहन नप अध्यक्ष और कर्म सिंह निजी सहायक चयन कमेटी के सदस्य बनाए थे।

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फर्जी दस्तावेज तैयार कर अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरियां देने का आरोप

दोनों ही कमेटियों के खिलाफ आरोप है कि उन्होंने सरकार की अनुमति और हिमाचल नगर सेवा अधिनियम 1994 के विपरीत साक्षात्कार लेकर फर्जी दस्तावेज तैयार कर अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरियां दीं। सात जून 2003 को तत्कालीन मुख्यमंत्री के ध्यान में मामला लाया गया और एसपी सतर्कता साउथ जोन शिमला का जांच के लिए मामला सौंपा।

पुलिस उपाधीक्षक राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने जांच रिपोर्ट सौंपी और दो दिसंबर 2016 को सरकार तथा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो सोलन के समक्ष सभी आरोपियों के खिलाफ  धारा 420, 468, 471, 120 बी और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13 (1) डी व 13 (2) में मामला दर्ज किया। अंतिम रिपोर्ट 17 जुलाई, 2013 को कोर्ट में रखी।

अभियोजन पक्ष की ओर से सात सितंबर 2018 को बिंदल और अन्य पर दर्ज मामला वापस लेने के लिए विशेष जज सोलन के समक्ष आवेदन दाखिल किया। स्पेशल जज सोलन ने 24 जनवरी 2019 को अभियोजन पक्ष की ओर से दायर आवेदन स्वीकार करने के बाद मामला वापस लेने की अनुमति दी। 24 जनवरी 2019 को पारित इस फैसले को हाईकोर्ट के समक्ष याचिका के माध्यम से चुनौती दी है।
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