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चीफ व्हिप पद पर नरेंद्र बरागटा की नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट का नोटिस

Thu, 30 May 2019 09:16 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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- फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश हाईकोर्ट ने कोटखाई से विधायक नरेंद्र बरागटा की मुख्य सचेतक के पद पर हुई नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका में राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश धर्मचंद चौधरी व न्यायाधीश ज्योत्सना रेवाल दुआ की खंडपीठ ने टेक चंद व अन्य तीन प्रार्थियों द्वारा दायर याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान ये आदेश पारित किए।

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प्रार्थियों ने मुख्य सचेतक के वेतन भत्ते और अन्य सुविधाएं अधिनियम 2018 को असंवैधानिक घोषित करने की गुहार लगाई है। साथ ही 25, सितंबर 2018 को जारी अधिसूचना को रद्द किया करने की  भी मांग की है जिसके तहत नरेंद्र बरागटा को मुख्य सचेतक के पद पर नियुक्त किया गया है। इसके अलावा वेतन व अन्य लाभ बरागटा को आज तक प्रदान किए गए हैं। उनको भी वसूलने की मांग की गई है। 

याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार वर्तमान समय में मुख्यमंत्री को मिला कर 12 मंत्री तैनात किए गए हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 में किए गए संशोधन के मुताबिक किसी भी प्रदेश में मंत्रियों की संख्या विधायकों की कुल संख्या का 15 फीसदी से अधिक नहीं हो सकती। राज्य सरकार ने सैलरी अलाउंस एंड अदर बेनिफिट्स ऑफ चीफ व्हिप एंड डिप्टी चीफ  व्हिप इन लेजिस्लेटिव असेंबली ऑफ हिमाचल प्रदेश एक्ट 2018 बनाया है जिसके तहत मुख्य सचेतक व उप मुख्य सचेतक की नियुक्ति करने बाबत प्रावधान बनाया गया है।
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इन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्रदान करने का प्रावधान बनाया गया है। मंत्रियों के लिए निर्धारित की गई संख्या सीमा पूरी करने के बाद यह पद निर्धारित संख्या से ज्यादा हो गया हैं। सचेतक का पद मंत्री के पद के बराबर है हालांकि उसे मंत्री नहीं कहा जाता मगर उसे सभी वहीं सुविधाएं प्रदान की जाती है जो एक मंत्री को प्रदान की जाती है। प्रार्थियों ने सचेतक की नियुक्ति को भारतीय संविधान के प्रावधानों के विपरीत कहते हुए इसे रद्दकरने की गुहार लगाई है। मामले पर सुनवाई 29 जुलाई को निर्धारित की गई है।

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