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Himachal: नगर निकायों के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव में विधायकों को वोट डालने का अधिकार नहीं, हाईकोर्ट का आदेश

Thu, 04 Jun 2026 11:04 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने नगर निगमों और नगर निकाय में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनावों को लेकर अंतरिम आदेश जारी किया है।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने नगर निगमों और नगर निकाय में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनावों को लेकर अंतरिम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पदेन सदस्य यानी विधानसभा सदस्य स्थानीय निकायों के शीर्ष पदों के चुनाव में मतदान नहीं कर सकते हैं। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वे हिमाचल प्रदेश के नगर निकायों में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चुनावों की प्रक्रिया को बिना किसी रुकावट के पूरा करें। यह चुनाव केवल निर्वाचित सदस्यों की इच्छा और बहुमत के आधार पर ही संपन्न कराया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में पदेन सदस्यों विधायकों को वोट डालने का कोई अधिकार नहीं होगा।

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अदालत ने स्पष्ट किया कि विधायकों के अधिकार पूरी तरह खत्म नहीं हुए

 शहरी  विकास विभाग की ओर से 13 जुलाई 2023 को कानून विभाग की राय का हवाला देते हुए एक स्पष्टीकरण जारी किया गया था, जिसमें विधायकों को वोट देने की वकालत की गई थी। हाईकोर्ट ने इसे विरोधाभासी और नियमों के खिलाफ मानते हुए इस पर तुरंत रोक लगा दी है। कोर्ट ने याद दिलाया कि नियमों की व्याख्या करने का अंतिम अधिकार राज्य चुनाव आयोग के पास है, सरकार के पास नहीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि विधायकों के अधिकार पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। अधिनियम की धारा 28, 30, 31 व 32 के तहत होने वाली सामान्य बैठकों, समितियों की बैठकों में विधायक भाग ले सकते हैं। 
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कोर्ट ने कहा- विधायकों को वोट देने की अनुमति देने से निकायों की स्वायत्ता में हस्तक्षेप होगा

 अदालत ने कहा कि नगर निकाय स्थानीय स्वशासन की संस्थाएं हैं। यदि विधायकों को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में वोट डालने की अनुमति दी जाती है, तो यह स्थानीय निकायों की स्वायत्तता में हस्तक्षेप होगा। स्थानीय स्तर पर जनता की ओर से दिए गए जनादेश का उल्लंघन होगा। हाईकोर्ट में वंदना कुमारी, संजय चौहान और नंदिनी सूद और अन्य की ओर से राज्य चुनाव आयोग के खिलाफ याचिकाएं दायर की गई थीं। मुख्य विवाद इस बात पर था कि क्या हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1994 और चुनाव नियम, 2015 के तहत विधायकों को निकायों के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष को चुनने के लिए वोट देने का अधिकार है या नहीं। सरकार ने तर्क दिया कि विधायकों को वोट देने का पूर्ण अधिकार है। कोर्ट ने इन तर्कों को खारिज कर दिया।
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