याचिककर्ता ने पूर्व सरकार के फैसले को दी है चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। नगर निगम शिमला के चुनाव में दूसरे विस क्षेत्र के लोगों के वोट बनाने के मामले पर दो मार्च को सुनवाई होगी। पूर्व सरकार की ओर से इस संबंध में किए संशोधन को हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी है।
शिमला नगर निगम चुनाव के लिए विधानसभा की तर्ज पर मतदाता सूची बनाने को लेकर यह संशोधन किया है।
याचिकाकर्ता कुनाल वर्मा ने आरोप लगाया है कि नगर निगम अधिनियम में संशोधन संविधान में दिए प्रावधानों के विपरीत है। पूर्व सरकार ने इस बारे 9 मार्च 2022 को अधिसूचना जारी की थी। याचिका में राजनीतिक लाभ पाने के लिए संविधान के विपरीत अधिसूचना करने का आरोप लगाया है। आरोप है कि शिमला नगर निगम चुनाव में लगभग 20 हजार लोग अपने मौलिक अधिकार का उपयोग करने से वंचित हो गए हैं। इसके तहत नगर निगम चुनाव में वही लोग वोट दे पाएंगे, जिनका नगर निगम शिमला विधानसभा की वोटर लिस्ट में नाम होगा। शिमला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के चार वार्ड और कसुम्पटी विधानसभा के दो वार्ड शिमला नगर निगम की परिधि में आते हैं। यह भी आरोप लगाया है कि राजनीतिक लाभ पाने के लिए 28 वर्षों के बाद नगर निगम चुनाव नियमों में संशोधन किया है। इस नियम को बनाने से पहले राज्य सरकार ने लोगों से कोई भी आपत्ति नहीं मांगी है। संशोधन के अनुसार नगर निगम शिमला क्षेत्र की परिधि से बाहर का कोई व्यक्ति यदि नगर निगम चुनाव में वोट डालना चाहता है तो उसे अपने गृह विधानसभा क्षेत्र से वोट कटवाना होगा।