नीम से निर्मित पट्टी हरी है जबकि एलोवेरा से बनी पट्टियां सफेद रंग की हैं। मंडी के सरदार पटेल विश्वविद्यालय में चल रहे अंतरराष्ट्रीय साइंस सेमिनार के दौरान इन उत्पादों की प्रस्तुति आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिक प्रो. भुवनेश गुप्ता ने दी। इसमें उनके ग्रुप की सदस्य हिमाचल निवासी डॉ. चेतना ने भी मदद की। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में इन उत्पादों को बहुत ही आसानी से तैयार किया जा सकता है। उनका ग्रुप इस प्रोजेक्ट में लगातार काम कर रहा है। उल्लेखनीय है कि हर्बल उत्पाद गुणवत्ता के साथ ही हर तबके के लोगों की पहुंच में हैं। इनको बहुत ही कम लागत में तैयार किया जा सकता है। इनकी कीमत बहुत कम है। प्रदेश में इन उत्पादों को बनाने के लिए कंपनियों को भी प्रेरित किया जा रहा है।
इस तरह बनाई जा सकती है हर्बल पट्टी
हर्बल पट्टी को बनाना बहुत ही सरल है। इसके लिए वायोपालिमर में एलोवेरा, हल्दी या नीम डाले जाते हैं। इसके बाद इसको मुलायम बनाने के लिए ग्लीसरीन या ऐसी ही कोई चीज डाली जाती है। बाद में कॉटन के कपड़े पर कोट कर देते हैं। इस तरह से हर्बल ड्रेसिंग तैयार कर सकते हैं।
रोजगार का साधन
प्रदेश में ड्रेसिंग के लिए हर्बल पट्टियां बनाना बहुत ही सरल और फायदेमंद है। इसके लिए प्रदेश में प्रचुर मात्रा में हल्दी, नीम, एलोवेरा और अन्य जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं। युुवा इस पर काम कर सकते हैं और इसे रोजगार का साधन भी बना सकते हैं। सबसे खास बात यह कि इन उत्पादों को बहुत कम लागत में तैयार किया जा सकता है।