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हिमाचल में भारी बर्फबारी, सैकड़ों सड़कें हुई बंद, कई वाहन फंसे

Wed, 13 Dec 2017 11:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल के पहाड़ी इलाकों में पिछले दो दिनों से हो रही भारी बर्फबारी राहत के साथ आफत भी लेकर आई है। पिछले दो माह का सूखा टूटने से किसानों-बागवानों को भले ही राहत मिली हो, लेकिन सूबे के कई इलाके देश-दुनिया से कट गए हैं। 
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बर्फबारी के चलते सैकड़ों सड़कें बंद हो गई हैं। करीब सौ बसों समेत सैकड़ों छोटे-बड़े वाहन बर्फ  में फंस गए हैं। प्रदेश के कई क्षेत्रों में पिछले 15 घंटे से बिजली गुल हो गई है। टेलीफोन और इंटरनेट सेवा भी ठप है। पूरे लाहौल स्पीति जिला का संपर्क कट गया है। 

किन्नौर के उपरी इलाके, चंबा के पांगी व भरमौर, कांगड़ा के बड़ा भंगाल, सिरमौर के चूड़धार और शिकारी देवी क्षेत्र में लोग बर्फ में कैद हो गए हैं। जलोड़ी दर्रा बंद होने से कुल्लू का आउटर सिराज क्षेत्र जिला मुख्यालय से अलग थलग हो गया है।
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हिमस्खलन का खतरा बढ़ा

रोहतांग दर्रे के बाद पूरी लाहौल घाटी में वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई है। किन्नौर जिले के कल्पा, रोघी, रक्षम, छितकुल, लिप्पा, आसरंग समेत कई रूट बंद हो गए हैं। चंडीगढ़-शिमला हाईवे पर भी भूस्खलन से जाम लग रहा है। 

पिछले दो दिनों में सबसे ज्यादा साढ़े चार फीट तक बर्फबारी प्र्रसिद्ध पर्यटन स्थल रोहतांग में रिकॉर्ड की गई है। चंद्रावैली-मढ़ी में तीन फुट, गौशाल-सोलंगनाला, शिकारी देवी, छितकुल में दो, पांगी-भरमौर में ढाई, केलांग, आसरंग में डेढ़ और जलोड़ी दर्रा, कमरूनाग में एक फुट बर्फबारी हुई है। 

लाहौल घाटी में हिमस्खलन का खतरा भी बढ़ गया है। अलर्ट के बीच उपायुक्त लाहौल देवा सिंह नेगी ने लोगों को मौसम साफ होने तक एक गांव से दूसरे गांव न जाने की हिदायत जारी की गई है। हालांकि, अभी तक किसी तरह की चेतावनी जारी नहीं हुई है, लेकिन प्रशासन सतर्कता बरत रहा है। 

कुफरी, नारकंडा और डलहौजी में सीजन का पहला हिमपात

राजधानी शिमला से सटे कुफरी, नारकंडा, खड़ापत्थर, धर्मशाला के त्रियुंड, नड्डी और चंबा के डलहौजी में सीजेन का पहला हिमपात हुआ है। सोमवार रात को मनाली में भी हल्की बर्फबारी हुई। शिमला शहर में दो दिनों से बारिश हो रही है। राजधानी समेत पूरा प्रदेश शीतलहर की चपेट में है। 

रोहतांग टनल बनेगी सहारा 
लाहौल घाटी में फंसे लोगों के लिए अब बाहर निकलने का एकमात्र सहारा रोहतांग टनल ही है। बीआरओ लेफ्टिनेंट जनरल श्रीवास्तव ने लाहौल घाटी के लोगों के लिए आपात स्थिति में रोहतांग टनल खोलने का आश्वासन दिया है। 

अधिकतम तापमान में छह डिग्री की कमी

ताजा बर्फबारी के बाद कोकसर और दारचा में का न्यूनतम तापमान -10 डिग्री तक पहुंच गया है। बारिश व बर्फबारी से प्रदेशभर का अधिकतम व न्यूनतम तापमान घट गया है। पिछले चौबीस घंटे में अधिकतम तापमान में जहां पांच से छह डिग्री की कमी दर्ज की गई है।

वहीं, न्यूनतम तापमान में भी एक से दो डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है। हिमाचल में सोमवार से शुरू हुई बारिश-बर्फबारी का दौर मंगलवार को भी जारी रहा, जिससे पारे में औसत 6 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है।  राजधानी शिमला से लेकर धर्मशाला, मनाली, डलहौजी, नारकंडा में दिनभर बारिश व बर्फबारी हुई। 

कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द 

प्रदेश में बर्फबारी से निपटने के लिए लोक निर्माण विभाग ने 22,000 कर्मचारियों को फील्ड में तैनात किया है। कई क्षेत्रों में बर्फबारी से मार्ग अवरुद्ध हो गए हैं। मौसम साफ होने तक कर्मचारियों की छुट्टियां रोक दी गई हैं। 

विभाग ने मुख्यालय शिमला में कंट्रोल रूम बनाया है। विभाग ने दुर्गम और पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित डिवीजन और सब डिवीजन कार्यालयों को बर्फ साफ करने के लिए अतिरिक्त मशीनरी भेज दी है। 

बीते साल बर्फबारी से अवरुद्ध मार्गों से सबक लेते हुए लोक निर्माण विभाग ने प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जेसीबी और डोजर भेजे हैं। इसके अलावा बर्फीले क्षेत्रों में रेत-बजरी और मिट्टी के ढेर लगाए गए हैं ताकि समय पर यातायात बहाल किया जा सके। 

विभाग की मानें तो शहरों में बर्फ हटाने के टेंडर भी आमंत्रित किए गए हैं। इसके अलावा निजी मशीनरियों को भी हायर किया गया है। लोक निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर एके चौहान ने कहा कि बर्फबारी से निपटने के लिए लोक निर्माण विभाग की तैयारियां पूरी हैं। 

बर्फबारी में बसें न चलाने के निर्देश 
परिवहन निगम ने एचआरटीसी चालकों और परिचालकों को बर्फबारी में बस चलाने का रिस्क न लेने के निर्देश दिए हैं। निगम प्रबंधन ने ऐसी स्थिति में सड़क के किनारे बसें खड़ी करने को कहा है।
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सेब के लिए संजीवनी है ताजा हिमपात 

हिमाचल में खेतीबाड़ी और बागवानी के लिए बारिश और बर्फबारी अच्छी है। पिछले दो दिन से बारिश और हिमपात का दौर रुक-रुककर चला हुआ है। इससे प्रदेश के किसानों और बागवानों को काफी राहत मिली है।

अब रबी फसलों की बुवाई और इससे संबंधित अन्य कामकाज हो सकेंगे, सेब पौधों के लिए वांछित चिलिंग ऑवर्स भी पूरे हो पाएंगे। पिछले काफी वक्त से हिमाचल प्रदेश में सूखे की स्थिति बनी हुई थी। इससे प्रदेश के कई क्षेत्रों के किसान खेतों में गेहूं, जौ और अन्य फसलों की बुवाई नहीं कर पा रहे थे।

कृषि विभाग ने भी इस बात को माना कि सूबे में 20 फीसदी क्षेत्र में बुवाई नहीं हो पाई। अब दो दिनों की बारिश से रबी फसलों को बोने के लिए किसानों को अवसर मिल गया है। इसी तरह से सेब बगीचों में भी बागवान तौलिए बनाने से लेकर अन्य काम करवा पाएंगे। 

एक से दूसरे तौलिए में न जाने दें बारिश का पानी : डॉ. सतीश 
डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के पर्यावरण विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सतीश भारद्वाज ने बागवानों को सलाह दी है कि बारिश का पानी एक तौलिए से दूसरे में न जाने दें। पौधों को पाले से बचाने के लिए सिंचाई की जाए। छोटे पौधों को पाले से बचाने के लिए घास और बोरी आदि से ढक लें। रोग और कीटग्रस्त शाखाओं की भी कांट-छांट करने के बाद इन्हें नष्ट कर दें। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे प्याज की तैयार पनीरी का खेतों में पौधरोपण कर सकते हैं। उन्होंने पशुपालकों को सलाह दी कि दोहन से पूर्व पशुओं के थनों को गुनगुने पानी से धोकर कपड़े से साफ कर लें।
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