बर्फबारी के बाद पिछले आठ दिन से मॉडल सेंट्रल जेल कंडा के करीब साढ़े पांच सौ कैदी बिना बिजली-पानी जीवन गुजार रहे हैं। सरकार और प्रशासन भी आम लोगों की चिंता कर रहे थे, लेकिन किसी ने कैदियों के हालात पर नजर नहीं डाली।
इन्हें टैंकरों से पानी मुहैया कराया जा रहा था। जेल फंड की कमी से जरूरत का भी पानी नहीं मिल रहा था। जेल की स्थिति ने सरकार के मॉडल जेल के दावे की पोल खोल दी है। सूत्रों की मानें तो तीन से पांच लीटर पानी प्रति कैदी दिया जा रहा था।
यह मात्रा आम दिनों के तीस लीटर पानी प्रति दिन प्रति कैदी के अनुपात में नाममात्र थी। तीन से पांच लीटर पानी में कैदी को नहाने, पीने और शौचालय के लिए गुजारा करना था। ऐसे में ज्यादातर कैदियों ने आठ दिन बिना नहाए ही गुजारे।
जेल सुपरिंटेंडेंट शेर चंद शर्मा ने बताया कि बर्फबारी के बाद से बिजली नहीं थी। इस वजह से पानी की सप्लाई भी नहीं हुई। उपलब्ध फंड से जितना हो सका, बिजली के लिए जेनरेटर का डीजल मंगाया गया। साथ ही पानी भी टैंकरों से मंगवाया गया।
सामान्य दिनों से पानी की सप्लाई कम ही हुई। अब जेल मुख्यालय को आने वाले समय में जरूरत पड़ने पर डीजल और पानी के लिए फंड उपलब्ध कराने को लिखा है।