चर्चा है कि शिमला में बैठे एक बड़े अधिकारी ने कसौली में सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई की जद्द में आए कुछ भवन मालिकों को यह मैसेज किए थे कि जो अनधिकृत तौर पर निर्माण हुए हैं, उसी हिस्से को तोड़ेेंगे, बाकी को नहीं। सरकार इस फैसले में आर्डिनेंस लाने वाली है।
बताया जा रहा है कि मौके पर पहुंची टीसीपी के अधिकारियों समेत कर्मचारियों में इसे लेकर भी रोष था। वहीं यह भी सूचना है कि इस मैसेज की वजह से माहौल ज्यादा गर्माया। टीसीपी के उस अधिकारी के मौके पर पहुंचने पर भी होटल मालिकों और कर्मचारियों ने रोष जताया है।
नहीं पहुंचे सरकार के प्रतिनिधि
ग्रामीणों को इस बात का भी मलाल है कि सरकार की तरफ से कोई भी मंत्री या विधायक इस दुख की घड़ी में परिवार को सांत्वना देने नहीं पहुंचा। क्षेत्र के विधायक जिनका आवास भी महिला अधिकारी के निवास से कुछ ही दूरी पर स्थित है, उन्होंने भी परिवार का हाल नहीं जाना, जबकि विपक्ष की ओर से कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अंतिम संस्कार के समय मौजूद रहे।
टीसीपी अधिकारी शैल बाला के पिता सेवानिवृत्त मुख्याध्यापक जेडी शर्मा ने भी अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि जब पता था कि वह एक खतरनाक मिशन पर जा रही थी तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए। मैंने बचपन से ही अपनी बेटी को ईमानदारी का पाठ पढ़ाया था।
मेरी बेटी बहादुर थी इसलिए चुनौतियों से उसने हमेशा लड़ना सीखा था, वह कभी पीछे नहीं हटती थी। उन्होंने कहा कि पुलिस के सामने किसी को गोलियों से उड़ा दिया गया और कोई भी रक्षा करने के लिए आगे नहीं आया। उन्होंने सरकार से अपनी बेटी के कातिल को शीघ्र पकड़ने और कठोर सजा देने की मांग की है।
एक करोड़ मुआवजा दे सरकार
कांग्रेस ने टीसीपी अधिकारी की हत्या को लेकर सियासी रंग दिखाना शुरू कर दिया है। सरकाघाट विधानसभा क्षेत्र के नेताओं समेत यदुपति ठाकुर, प्रवीण चंदेल, महासचिव शिवेश शर्मा, सौरव शर्मा, सचिव गौरव शर्मा, किरण कुमार, संतोष ठाकुर ने सरकार को सोया हुआ करार देते हुए प्रभावित परिवार को एक करोड़ मुआवजा देने की मांग की है।