पूर्व मुख्य सचिव पी. मित्रा से जुड़े मामले में पंचकूला के कारोबारी विनोद मित्तल के वॉयस सैंपल और पॉलीग्राफ टेस्ट करवाने के आदेशों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई 29 मई के लिए टल गई है। आरोपी को वॉइस सैंपल देने के लिए कानूनन बाध्य किया जा सकता है या नहीं ?
यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित है। इस कारण न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने विनोद मित्तल के वॉइस सैंपल और पॉलीग्राफ टेस्ट लेने के निचली अदालत के आदेशों पर रोक लगा रखी है।
भ्रष्टाचार के मामले में तत्कालीन प्रधान सचिव राजस्व पी. मित्रा भी आरोपी हैं। करीब नौ साल पुराने इस मामले में विजिलेंस ने केस दर्ज किया है। विजिलेंस के पास आरोपियों के बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग है।
इसमें पी. मित्रा के अलावा विनोद मित्तल और अन्य व्यक्ति के बीच बातचीत की आशंका जताई गई है। इसकी पुष्टि के लिए वॉयस सैंपल के साथ पॉलीग्राफ टेस्ट करवाया जाना है। हिमाचल में गैर हिमाचलियों को भू-राजस्व अधिनियम की धारा 118 में जमीन खरीदने की अनुमति लेना जरूरी है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 21 मार्च 2011 को आरोपी विनोद मित्तल ने आला राजस्व अधिकारियों को प्रभावित करने के लिए पांच लाख रुपये लेकर शिमला आया। परंतु उसे पुराने बस अड्डा शिमला में विजिलेंस की ओर से पकड़ लिया गया था।