हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह आय से अधिक संपत्ति मामले में मंगलवार को कोर्ट में पेश नहीं हुए। सिंह ने अर्जी दायर कर पेशी से छूट मांगी थी जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया।
कोर्ट ने वीरभद्र सिंह व अन्य आरोपियों को चार्जशीट के साथ पेश किए गए दस्तावेजों की कॉपी आरोपियों को देने का निर्देश सीबीआई को दिया है। केस की सुनवाई के लिये 30 नवंबर की तारीख तय की गई है।
पटियाला हाउस स्थित विशेष सीबीआई जज वीरेंद्र कुमार गोयल के समक्ष वीरभद्र सिंह को पेशी से स्थायी छूट देने के लिये अर्जी दायर कर गई। इस अर्जी पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने उन्हें व उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह को एक दिन के लिए पेशी से छूट दे दी।
सीबीआई ने इस अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि उन्हें पेशी से स्थायी छूट नहीं दी जा सकती क्योंकि ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। एजेंसी ने बताया कि वीरभद्र सिंह व अन्य आरोपियों को काफी दस्तावेज दिए जा चुके हैं। सीबीआई ने इस मामले में तीन अप्रैल 2017 को दाखिल की थी।
एजेंसी ने चार्जशीट में 225 गवाहों व 442 दस्तावेजों का हवाला दिया है। सीबीआई ने 23 सितंबर 2016 को वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह, एलआईसी एजेंट आनंद चौहान और एक सहयोगी चुन्नी लाल के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।
सीबीआई ने आरोप पत्र में कहा, प्रारंभिक जांच में पाया गया कि वीरभद्र सिंह ने 2009 से 2012 तक केंद्रीय मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान आय से अधिक 6.03 करोड़ रुपये की संपत्ति कथित तौर पर अर्जित की थी।