शिमला। हिमकेयर योजना का कार्ड मरीजों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। कार्ड के न चल पाने के कारण मरीजों को दवाइयों समेत टेस्ट महंगी दरों पर करवाने पड़ रहे है। रविवार को आईजीएमसी में ऐसा मामला आया। शिमला के रहने वाले हरिंद्र के बेटे को पेट में कुछ समस्या थी। इलाज के लिए जब अभिभावक अस्पताल लाए तो डॉक्टरों ने ब्लड, अल्ट्रासाउंड सहित कई टेस्ट लिख दिए। अभिभावक जब कार्ड लेकर काउंटर पर पहुंचे तो यहां बैठे कर्मचारियों ने कार्ड न चलने की बात कही। बच्चे के टेस्ट एसआरएल लैब में पैसे देकर करवाने पड़े।
सभी टेस्ट में एक हजार रुपये से अधिक खर्च हो गए। बेटे के अभिभावक हरिंद्र ने कहा कि अब तक बेटे के इलाज में काफी खर्च हो चुका है। अब हेल्थ कार्ड बनाया है, पर इसके न चलने से परेशानी हो रही है। हिमकेयर योजना के नोडल अफसर देवेंद्र कुमार ने बताया कि अगर इमरजेंसी केस होता है तो अस्पताल में बैठे कर्मचारी फोन कर सूचित करते हैं, ताकि ऐसे मरीज को प्राथमिकता मिल सके। इसके लिए अलग से एक टीम बनाई है। एक जून से 10 जुलाई तक एक लाख 70 हजार लोगों की एप्लीकेशन योजना में शामिल होने को आ चुकी है।
दोपहर बाद मिली मंजूरी
हरिंद्र ने बताया कि बच्चे के दाखिल होने के बाद जब वह केंद्र में गए थे, तब उन्हें वहां से भेज दिया गया। मामला उजागर हुआ तो दोपहर बाद उनके कार्ड को लेकर अप्रूवल भी मिल गई। योजना में शामिल होने के बाद दाखिल मरीज को पांच लाख रुपये तक इलाज मुफ्त दिया जाता है।
उत्तराखंड में बना है कार्ड
नेपाली मूल की रहने वाली खुशी माला का आयुष्मान कार्ड है। यह कार्ड उत्तराखंड का बना है। महिला का स्टोन का ऑपरेशन होना है। जिसमें कि पंद्रह हजार रुपये खर्च होने है, लेकिन कार्ड उत्तराखंड का होने के कारण यह अस्पताल में नहीं चल रहा है। जिससे कि महिला को परेशानी झेलनी पड़ रही है।