प्रदेश के 133 आयुष आरोग्य मंदिरों को एनएबीएच की मान्यता
विभाग की ओर से एनएबीएच मान्यता के लिए भेजा था प्रस्ताव
केंद्रीय टीम ने नियमों के अनुसार की है आरोग्य मंदिरों की जांच
आदित्य सोफत
शिमला। प्रदेश में पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को मजबूती देने के लिए आयुष आरोग्य मंदिरों को बड़ी सफलता मिली है। इन अस्पतालों में पीड़ितों को चिकित्सा परामर्श से लेकर विभिन्न प्रकार की जांच तक की सुविधा दी जाएगी। प्रदेश में के 133 आयुष आरोग्य मंदिरों को अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएच) की मान्यता मिली है। विभाग की ओर से इन आरोग्य मंदिरों को एनएबीएच स्तर का बनाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया था।
प्रस्ताव मिलने के बाद केंद्रीय निरीक्षण टीम ने प्रदेश के इन आयुष आरोग्य मंदिरों का दौरा किया था। जांच के दौरान मरीजों के इलाज की गुणवत्ता, दवाइयां के रखरखाव, स्वच्छता, आपातकालीन इंतजाम, रिकॉर्ड प्रबंधन और स्टाफ की दक्षता को परखा गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार 133 अस्पताल एनएबीएच नियमों के तहत खरे पाए गए हैं। इन अस्पतालों में मरीजों को आयुर्वेदिक व अन्य आयुष पद्धतियों के तहत चिकित्सकीय परामर्श और बीमारियों का सटीक इलाज मिलेगा। आरोग्य मंदिरों में आने वाले मरीजों को गुणवत्तापूर्ण आयुष दवाएं मुफ्त मुहैया कराई जाएंगी। ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, हीमोग्लोबिन जैसी जरूरी स्वास्थ्य जांचों की सुविधा केंद्र पर ही मिलेगी। गैर-संचारी रोगों की समय पर पहचान के लिए स्क्रीनिंग के साथ-साथ निरोगी जीवनशैली के लिए नियमित योग व ध्यान सत्र आयोजित किए जाएंगे।
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ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को मिलेगा फायदा
आयुष आरोग्य मंदिरों को एनएबीएच की मुहर मिलने से अब ग्रामीण व दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों घरद्वार पर ही बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। ऐसे में मरीजों को बड़े स्तर के आयुष अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा। इससे बड़े अस्पतालों पर मरीजों का दबाव कम होगा। विभाग का लक्ष्य आने वाले समय में प्रदेश के अन्य आयुष आरोग्य केंद्रों को भी एनएबीएच मानकों के तहत लाना है, ताकि हर नागरिक तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सकें।
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प्रदेश के 133 आयुष आरोग्य मंदिरों को एनएबीएच की मान्यता मिली है। इसका फायदा लोगों को सीधे तौर पर मिलेगा। अस्पताल में सभी प्रकार की सुविधाएं प्रदान करने का प्रयास आयुष विभाग ने किया है।
-रोहित जमवाल, आयुष निदेशक